सच की आंखें न्यूज़ गंजबासौदा। गंजबासौदा रेलवे स्टेशन पर करीब दो सप्ताह पूर्व तीन वर्षीय मासूम के गले से सोने की चेन (हाय), चाकू और लॉकेट काटने के मामले में जीआरपी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दो संदिग्ध आरोपियों की पहचान हुई थी। इनमें से एक आरोपी को विदिशा जीआरपी ने पकड़कर उसके पास से सोने की चेन और चाकू बरामद किया था। बाद में बरामद सामान गंजबासौदा जीआरपी को सौंपा गया और पीड़ित परिवार से उसकी पहचान भी कराई गई।मामले में आगे की कार्रवाई और दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी लेने के लिए पीड़ित परिवार के साथ नगर के जैन समाज के संगठन अभय सेना के सदस्य जीआरपी थाने पहुंचे। आरोप है कि वहां स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया गया। पीड़ित परिवार को कथित तौर पर यह तक कहा गया कि यदि सभी लोग आरोपी को पहचानते हैं तो उसे पकड़कर थाने ले आएं।
परिजनों के अनुसार, कुछ समय बाद पुलिस की ओर से यह भी सवाल किया गया कि आरोपी को पकड़कर लाने पर उसे रखा कहां जाएगा। वहीं, जिस आरोपी को पहले पकड़ा गया था, उसे भी बाद में छोड़ दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस द्वारा इसके पीछे माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब मामले में दूसरा आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ था, तब पहले पकड़े गए आरोपी को छोड़ने और मामले में बरामदगी पूरी नहीं होने को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। बताया गया कि कीमती पत्थर जड़ा लॉकेट अभी तक बरामद नहीं हुआ है।
वहीं, जीआरपी की ओर से स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए पीड़ित परिवार को विदिशा में संबंधित अधिकारी महेंद्र सिंह शाक्य के पास जाने की बात कही गई। बताया गया कि वहां से स्टाफ उपलब्ध होने के बाद ही आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकेगी।
मामले में पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठन ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा कर दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी, शेष सामान की बरामदगी तथा अब तक की कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
