फेक न्यूज के दौर में हम ‘नेक न्यूज’ वाले बनें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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फेक न्यूज के दौर में हम ‘नेक न्यूज’ वाले बनें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पत्रकारिता में सत्ता का विरोध ठीक, लेकिन देश का विरोध नहीं होना चाहिए : मुख्यमंत्री देशहित को सर्वोपरि रखते हुए पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने का आह्वान मुख्यमंत्री ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के ‘सत्रारंभ-अभ्युदय 2026’ का किया शुभारंभ
भोपाल/छिंदवाड़ा, 18 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि फेक न्यूज के दौर में हमें ‘नेक न्यूज’ के वाहक बनना चाहिए। पत्रकारिता में सत्ता का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन देश का विरोध नहीं होना चाहिए। हमारे लिए न्यूज से ऊपर नेशन होना चाहिए और देशहित को सर्वोपरि रखते हुए पत्रकारिता की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के ‘सत्रारंभ-अभ्युदय 2026’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा मां सरस्वती, भारत माता और दादा माखनलाल चतुर्वेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का किया विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों ‘दो सदी साक्षी’, विकल्प लैब जर्नल ‘मैं न्यूज रूम’ और भारत की टेंपल इकोनॉमी पर केंद्रित जर्नल ‘इंडियन कलाईडोस्कोप’ का विमोचन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं परिधि पुजारी, तमन्ना लश्कर और शिविका गुप्ता को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में लगाई गई ‘100 साल से 100 सुर्खियां’ प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री को ‘माखन के लाल’ और ‘कार्टून कथा’ पुस्तकें तथा अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत किया।

कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक एवं साहित्यकार श्री पीयूष मिश्रा तथा देशभर से आए विश्वविद्यालय के 50 पूर्व विद्यार्थी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय देश के उत्कृष्ट पत्रकारिता एवं संचार संस्थानों में अपनी पहचान बना चुका है। यह पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां के विद्यार्थियों ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में देशभर में अपनी पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में दादा माखनलाल चतुर्वेदी और अन्य साहित्यकारों एवं पत्रकारों ने निर्भीकता से सच्चाई का साथ दिया। आज की पीढ़ी को भी पत्रकारिता की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। राज्य सरकार विश्वविद्यालय के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

आपातकाल में समाचार पत्रों ने लोकतंत्र की रक्षा की

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर ने भी लेखन एवं पत्रकारिता के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 1857 के संघर्ष के वास्तविक स्वरूप को सामने लाने का प्रयास किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने लेखन एवं पत्रकारिता का कार्य जारी रखा।

उन्होंने कहा कि देश में हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा रही है। आपातकाल के दौर में भी समाचार पत्रों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्कालीन सत्ता का विरोध किया। अपनी असहमति व्यक्त करने के लिए कई समाचार पत्रों ने अपने संपादकीय पृष्ठ तक खाली छोड़ दिए थे।

भारत में प्राचीन काल से रही संचार की सशक्त परंपरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही संचार एवं सूचना के आदान-प्रदान की सशक्त परंपरा रही है। महर्षि वाल्मीकि ने लव-कुश के माध्यम से भगवान श्रीराम की कथा को समाज तक पहुंचाया। इसी प्रकार देवर्षि नारद ने भी विभिन्न स्थानों तक सूचनाओं के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में संचार का स्वरूप सदैव समाज को जोड़ने और ज्ञान के प्रसार का माध्यम रहा है।

विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सीख

कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी आज देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नकारात्मक विचारों को स्वयं पर हावी न होने देने तथा सकारात्मक सोच के साथ देश और समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक एवं साहित्यकार श्री पीयूष मिश्रा ने भोपाल की संस्कृति, आत्मीयता, खानपान और परंपराओं की सराहना की।

विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. पी. शशिकला ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. विजय अग्रवाल, श्री हेमंत मुक्तिबोध सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अतिथि विद्वान, नवागत एवं पूर्व विद्यार्थी तथा अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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