आदिवासी महोत्सव में पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके बनीं आदिवासी फैशन शो की शो-स्टॉपरदिव्यांग बच्चियों सहित युवतियों ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में रैंप वॉक कर बढ़ाया समाज का गौरव

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आदिवासी महोत्सव में पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके बनीं आदिवासी फैशन शो की शो-स्टॉपर दिव्यांग बच्चियों सहित युवतियों ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में रैंप वॉक कर बढ़ाया समाज का गौरव



छिंदवाड़ा। आदिवासी महोत्सव-2026 में आयोजित आदिवासी फैशन शो आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। कार्यक्रम में जिले की गौरव एवं पूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शो-स्टॉपर के रूप में रैंप पर उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी गरिमामयी प्रस्तुति ने आदिवासी संस्कृति, परंपरा और गौरव को नई पीढ़ी के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान युवतियों के साथ उन्होंने गोंडी नृत्य में भी सहभागिता की, जिससे कार्यक्रम स्थल पर उत्साह और उमंग का माहौल बन गया।

रविवार को अन्नपूर्णा रेस्टोरेंट, पूजा लॉन, छिंदवाड़ा में आयोजित आदिवासी महोत्सव में पूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि आईपीएस अधिकारी श्रीमती निवेदिता गुप्ता, राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी, रोटरी क्लब के असिस्टेंट गवर्नर रोटे. विनोद तिवारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

महोत्सव में आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य और आधुनिक प्रस्तुतियों का सुंदर संगम देखने को मिला। आदिवासी फैशन शो में महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक परिधानों में रैंप वॉक कर आदिवासी संस्कृति की विविधता और खूबसूरती को प्रदर्शित किया। दिव्यांग बच्चियों सहित बाल प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का भावुक क्षण उस समय आया, जब एक दृष्टिबाधित बच्ची ने अपनी शानदार गीत प्रस्तुति दी। उसके आत्मविश्वास और प्रतिभा से प्रभावित होकर उपस्थित दर्शकों ने तालियों के साथ उसका उत्साहवर्धन किया। छोटी बच्चियों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने भी खूब तालियां बटोरीं।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके ने युवतियों के साथ गोंडी नृत्य कर आदिवासी संस्कृति के प्रति अपने जुड़ाव और सम्मान को प्रदर्शित किया। उनकी सहभागिता ने महोत्सव के उत्साह को और बढ़ा दिया।

मंच संचालन पालक एवं आयशा लोधी ने प्रभावी ढंग से किया। उन्होंने विभिन्न प्रस्तुतियों और अतिथियों का परिचय कराते हुए पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित एवं जीवंत बनाए रखा।

आयोजन को सफल बनाने में डॉ. विजय यादव, इति शर्मा, ऋतु गोयल, पारुल पांडे, माही खंडेलवाल, श्वेता घई, श्वेता नायक, आरती दुबे, कोशिमा राजक, पिंटू द्विवेदी, शैलेंद्र उजवाने एवं मोहम्मद स्माइल सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम में दिव्य प्रेम फाउंडेशन की भी महत्वपूर्ण सहभागिता रही। आयोजक दिव्या कटारे एवं सह-आयोजक सुमित जायसवाल, डॉ. हितेश भलावी, डॉ. मीरा पराडकर, आयशा लोधी एवं अलका शुक्ला ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं का संरक्षण करते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा महिलाओं, युवतियों और बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराना है।

महोत्सव में लोकनृत्य, संगीत, आदिवासी फैशन शो, पारंपरिक परिधान और बाल प्रतिभाओं की प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के माध्यम से संस्कृति संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण, प्रतिभा सम्मान, सामाजिक समावेशिता, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी गौरव का संदेश भी दिया गया।

समारोह के अंत में सभी प्रतिभागियों को अतिथियों के हाथों मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं मंचासीन सभी अतिथियों को दिव्य प्रेम फाउंडेशन की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
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