प्रधानमंत्री के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में अभियान को मिल रही नई गति
12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स, 213 पंजीकृत संस्थाएं और नशामुक्ति केंद्रों के जरिए जागरूकता से उपचार तक प्रयास
छिंदवाड़ा । देश की युवा शक्ति को नशे से दूर रखते हुए स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में नशामुक्त भारत अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने नशामुक्ति को केवल जागरूकता अभियान तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी, उपचार, पुनर्वास और संस्थागत समन्वय पर विशेष जोर दिया है।
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रदेशभर में नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता पैदा करने के साथ नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार एवं पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जनजागरण से जनआंदोलन तक
नशे की समस्या व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करती है। इसे देखते हुए सरकार ने अभियान में विद्यालयों-महाविद्यालयों, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।
प्रदेश में नशामुक्ति के क्षेत्र में 213 पंजीकृत संस्थाएं कार्यरत हैं। ये संस्थाएं जागरूकता के साथ नशे से प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने में भी भूमिका निभा रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश को सम्मान
नशामुक्त भारत अभियान में मध्यप्रदेश के प्रभावी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। वर्ष 2023-24 की संस्थागत पुरस्कार श्रेणी में शहीद भगत सेवा समिति, रीवा तथा व्यक्तिगत श्रेणी में श्री राजीव तिवारी, मुक्ति नशामुक्ति केंद्र, भोपाल को सम्मानित किया गया। 13 अगस्त 2025 को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय नशामुक्ति शपथ ग्रहण समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया।
उपचार और पुनर्वास पर विशेष जोर
सरकार का उद्देश्य नशे की गिरफ्त में आए लोगों को केवल नशे से दूर करना ही नहीं, बल्कि उपचार, परामर्श और पुनर्वास के माध्यम से उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ना भी है।
प्रदेश में 13 नशामुक्ति सह पुनर्वास केंद्र (IRCA), 7 आउटरीच एंड ड्रॉप-इन सेंटर (ODIC) और 3 कम्युनिटी बेस्ड पीयर-लेड इंटरवेंशन सेंटर (CPLI) संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से नशे से प्रभावित लोगों तक पहुंचकर उन्हें उपचार और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के संचालन और विस्तार के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स संभाल रहे जागरूकता की कमान
नशे के खिलाफ अभियान को गांव-गांव और समुदाय स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। ये स्वयंसेवक आमजन को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने, युवाओं से संवाद स्थापित करने और नशामुक्त भारत अभियान की गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि नशे की समस्या का समाधान केवल कानून और प्रशासन के जरिए संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, समाज और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
युवा और विद्यार्थियों पर विशेष फोकस
अभियान के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों को विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों सहित सार्वजनिक स्थानों पर नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किए गए। डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए QR Code के जरिए करीब 2.46 लाख ऑनलाइन ई-प्लेज भी कराए गए।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस, अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस, मद्य निषेध सप्ताह और मद्य निषेध संकल्प दिवस जैसे अवसरों पर भी विशेष जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।
पुलिस की भी प्रभावी भागीदारी
नशामुक्त समाज के निर्माण में पुलिस की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा “नशे से दूरी है बहुत जरूरी” जैसे अभियानों के माध्यम से नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया। विभिन्न विभागों, पुलिस, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज के बीच समन्वय से नशे के खिलाफ व्यापक वातावरण तैयार किया जा रहा है।
सामूहिक संकल्प से बनेगा नशामुक्त मध्यप्रदेश
नशामुक्त मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए सरकार के साथ प्रत्येक परिवार और नागरिक की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। युवाओं को नशे से दूर रखने, नशे की चपेट में आए लोगों को सहयोग देने और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
जनभागीदारी, जागरूकता, उपचार और पुनर्वास के समन्वित प्रयासों से ही स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार किया जा सकता है।
