22 मौतों और 112 से अधिक मरीजों की घटना के बाद क्या अब हर तहसील में होगी धरातलीय जांच?
जुन्नारदेव में ढाबों पर कथित खुलेआम शराब बिक्री की शिकायतें, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों? — हर तहसील में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग
सच की आंखें न्यूज़ जुन्नारदेव। सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की घटना ने अवैध शराब के कारोबार को लेकर पूरे प्रदेश में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। घटना के बाद आरोपियों पर कार्रवाई के साथ प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय किए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे में अब छिंदवाड़ा जिले के आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। जुन्नारदेव सहित जिले की विभिन्न तहसीलों में ढाबों, होटलनुमा प्रतिष्ठानों और अन्य स्थानों पर कथित रूप से नियमों के विपरीत शराब बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
यदि इन शिकायतों में सच्चाई है तो सवाल यह है कि आबकारी विभाग की मैदानी निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है?
सागर जैसी घटना के बाद भी इंतजार क्यों?
सवाल यह नहीं है कि हादसा होने के बाद कितनी कार्रवाई होगी। सवाल यह है कि हादसा होने से पहले अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
जिला आबकारी विभाग को केवल कार्यालयीन स्तर पर कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय हर तहसील में स्वयं पहुंचकर ढाबों, संदिग्ध स्थानों और शराब बिक्री वाले संवेदनशील क्षेत्रों का भौतिक निरीक्षण करना चाहिए।
विभाग से जनता के सीधे सवाल
- छिंदवाड़ा जिले के सभी ढाबों और संदिग्ध शराब बिक्री स्थलों की नियमित जांच कब और कितनी बार हुई?
- कितने प्रतिष्ठानों के लाइसेंस और शराब बिक्री की अनुमति की जांच की गई?
- पिछले छह महीनों में तहसीलवार कितने अवैध शराब प्रकरण दर्ज किए गए?
- कितनी शराब जब्त हुई और कितने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई?
- अवैध शराब बिक्री की शिकायत मिलने पर विभाग की तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था क्या है?
- क्या सागर की घटना के बाद जिले में विशेष जांच अभियान शुरू किया गया है?
- क्या जिला स्तर के अधिकारी जुन्नारदेव, परासिया, तामिया, अमरवाड़ा, हर्रई, बिछुआ, सौसर, मोहखेड़ सहित प्रत्येक तहसील में मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे?
अब कागजी कार्रवाई नहीं, धरातल पर जांच जरूरी
सागर की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध शराब के मामले में लापरवाही कितनी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और आबकारी विभाग को किसी अनहोनी का इंतजार किए बिना अभी से सघन जांच अभियान चलाना चाहिए।
यदि किसी स्थान पर अवैध शराब बिक्री पाई जाती है तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई हो और जहां विभागीय स्तर पर लापरवाही सामने आए, वहां संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जाए।
जनता का सवाल साफ है—क्या आबकारी विभाग छिंदवाड़ा जिले की प्रत्येक तहसील में स्वयं पहुंचकर जांच करेगा, या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही विभाग जागेगा?
अब जरूरत कागजों में निरीक्षण की नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखने की है। जिला आबकारी अधिकारी को तहसीलवार विशेष जांच अभियान चलाकर इसकी सार्वजनिक जानकारी भी देनी चाहिए, ताकि आम लोगों का भरोसा प्रशासन पर कायम रहे।
