भोपाल। रेलवे स्टेशन भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थल होते हैं, जहां हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में असहाय, जरूरतमंद और भटके हुए लोगों की पहचान कर उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराना रेल पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) द्वारा ‘ऑपरेशन हमदर्द’ चलाया जा रहा है।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में आयोजित विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम में विशेष पुलिस महानिदेशक, रेल, भोपाल श्री राजाबाबू सिंह ने ऑपरेशन हमदर्द की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश जीआरपी द्वारा प्रदेशभर के 548 रेलवे स्टेशनों पर ऐसे लोगों का डिजिटल डोजियर तैयार किया गया है, जिनमें घर से नाराज होकर आए लोग, सामाजिक परिस्थितियों के कारण घर छोड़ने वाले तथा अन्य जरूरतमंद लोग शामिल हैं। डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य माध्यमों की सहायता से इन लोगों की पहचान कर उनके परिजनों से मिलाने का कार्य किया गया।
श्री सिंह ने कहा कि ऑपरेशन हमदर्द पुलिस की संवेदनशील एवं मानवीय छवि को सामने लाने वाला प्रोएक्टिव पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन की अपनी एक कहानी होती है। जीआरपी ने रेलवे परिसरों में मौजूद असहाय लोगों की स्थिति को समझकर उनकी मदद करने और उन्हें परिवार से मिलाने की पहल की है।
विद्यार्थियों से संवाद करते हुए श्री सिंह ने पुलिस व्यवस्था में आए बदलावों पर भी चर्चा की। उन्होंने उदारीकरण के दौर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वर्तमान दौर तक पुलिसिंग में हुए बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज सिटिजन जर्नलिज्म का दौर है। पत्रकारिता न केवल नरेटिव तैयार करती है, बल्कि जनमत निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में पत्रकारों का नैतिक दायित्व और अधिक बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान बताने या समझने में सक्षम नहीं है, तो सीसीटीवी फुटेज सहित विभिन्न डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर घटनाक्रम को जोड़ने और उसकी पहचान कर परिजनों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि पुलिस के पब्लिक फ्रेंडली नवाचार पुलिस का मानवीय चेहरा प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन हमदर्द जैसे प्रयास पुलिसिंग की मानवीय छवि को समाज में स्थापित करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रोफेसर पी. शशिकला ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थी, शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
