“हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार” के ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा मानवाधिकार आयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादवअंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की

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“हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार” के ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा मानवाधिकार आयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की

भोपाल/छिंदवाड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग पिछले तीन दशकों से “हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार” के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए मानवाधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए कार्य कर रहा है। लोकतंत्र में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सभी के साथ समानता का भाव रहा है। मानवाधिकारों का मूल उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को समान गरिमा, अधिकार और न्याय का अवसर उपलब्ध कराना है। प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी है तथा सरकार इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

स्मारिका और न्यूज लेटर का विमोचन

समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानवाधिकारों के संरक्षण एवं शासकीय योजनाओं की पहुंच पर केंद्रित स्मारिका, आयोग के त्रैमासिक न्यूज लेटर और डायरी का विमोचन किया। इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानवाधिकारों के संरक्षण तथा शासकीय योजनाओं की पहुंच विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई।

मुख्यमंत्री ने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

जनजातीय समाज का विकास सामाजिक और नैतिक दायित्व : विजय शाह

जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय समाज का विकास केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि समाज का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य भी है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आत्मसम्मान नहीं आता, तब तक विकास की यात्रा अधूरी है।

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में जनजातीय विकास के लिए 8 हजार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के गांवों में स्कूल, छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र, पक्के आवास और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है।

मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता जरूरी : आयोग

मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़े अधिकार ही मानवाधिकार हैं। उन्होंने बताया कि आम नागरिकों में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोग द्वारा विभिन्न जिलों में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग के पीड़ितों को मानवाधिकारों से जुड़े मामलों में अब तक 6 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने शासकीय योजनाओं की जानकारी स्थानीय बोलियों में उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सम्मानित

समारोह में मिशन कर्मयोगी के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और कार्यालयों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इनमें चंबल संभाग के संभागीय उपायुक्त बृजेश चंद्र पाण्डेय, उज्जैन संभाग के संभागीय उपायुक्त गणेश भांवर सहित विभिन्न जिलों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। व्यक्तिगत श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।

आयोग के प्रभारी सचिव मुकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग की स्थापना 13 सितंबर 1995 को हुई थी। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस का यह अवसर जनजातीय समुदाय सहित समाज के सभी वर्गों के मानवाधिकारों के संरक्षण और शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है।

कार्यक्रम में मानवाधिकार आयोग, जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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