प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से स्वरोजगार को मिली नई पहचानखुले में मछली विक्रय से आधुनिक फिश कियोस्क तक श्रीमती संध्या कुशमरिया का आत्मनिर्भरता सफर

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से स्वरोजगार को मिली नई पहचान

खुले में मछली विक्रय से आधुनिक फिश कियोस्क तक श्रीमती संध्या कुशमरिया का आत्मनिर्भरता सफर


छिंदवाड़ा। आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने के लिए हमेशा बड़े अवसरों की आवश्यकता नहीं होती। कई बार सही समय पर मिला सहयोग जीवन में बड़ा बदलाव ला देता है। छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखंड के ग्राम चांद की श्रीमती संध्या कुशमरिया की कहानी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से अपने पारंपरिक मछली विक्रय व्यवसाय को व्यवस्थित और स्थायी स्वरोजगार में बदल दिया है।

खुले में मछली बेचने से शुरू हुआ सफर

श्रीमती संध्या लंबे समय से मछली विक्रय का कार्य कर रही थीं। पहले वे छिंदवाड़ा रोड स्थित मछली बाजार में खुले स्थान पर मछली बेचती थीं। सीमित सुविधाओं के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। मौसम की मार, स्वच्छता संबंधी समस्याएं, मछली को सुरक्षित रखने में कठिनाई और ग्राहकों के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव उनके व्यवसाय की प्रमुख चुनौतियां थीं।

इन परिस्थितियों में उनकी मछली बिक्री लगभग 10 से 15 किलोग्राम प्रतिदिन तक सीमित थी और मासिक आय करीब 8 से 10 हजार रुपये थी।

योजना से मिली नई दिशा

मत्स्योद्योग विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत श्रीमती संध्या को फिश कियोस्क स्थापित करने का अवसर मिला। कुल 10 लाख रुपये की इकाई लागत में उन्हें 6 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई।

फिश कियोस्क स्थापित होने के बाद उनके व्यवसाय में उल्लेखनीय बदलाव आया। अब वे उसी छिंदवाड़ा रोड स्थित मछली बाजार में खुले स्थान के बजाय व्यवस्थित फिश कियोस्क के माध्यम से मछली का विक्रय कर रही हैं।

बढ़ी बिक्री, दोगुनी से अधिक हुई आय

फिश कियोस्क के माध्यम से मछली बिक्री की व्यवस्था अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित हुई। इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और व्यवसाय का विस्तार भी हुआ। वर्तमान में श्रीमती संध्या प्रतिदिन करीब 30 से 40 किलोग्राम मछली बेच रही हैं। उनकी औसत मासिक आय बढ़कर लगभग 25 हजार रुपये हो गई है।

इस तरह योजना के सहयोग से न केवल उनके व्यवसाय का विस्तार हुआ, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

फिश कियोस्क ने श्रीमती संध्या को केवल व्यवसाय के लिए एक बेहतर स्थान ही नहीं दिया, बल्कि उनके काम को स्थायित्व और नई पहचान भी दी है। अब वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

खुले में मछली बेचने से लेकर आधुनिक फिश कियोस्क के संचालन तक का उनका सफर यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलने पर महिलाएं मत्स्य क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

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