भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कष्ट सहे, दूसरों के लिए प्रशस्त किया सुख-समृद्धि का मार्ग : मुख्यमंत्री डॉ. यादवश्रीराम-श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित कर रही राज्य सरकारमुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दीं जन्माष्टमी की शुभकामनाएं, बाल-गोपालों को खिलाया माखनमलखंभ खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन, सुमधुर भजनों से मुख्यमंत्री निवास हुआ श्रीकृष्णमय

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भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कष्ट सहे, दूसरों के लिए प्रशस्त किया सुख-समृद्धि का मार्ग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
श्रीराम-श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित कर रही राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दीं जन्माष्टमी की शुभकामनाएं, बाल-गोपालों को खिलाया माखन
मलखंभ खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन, सुमधुर भजनों से मुख्यमंत्री निवास हुआ श्रीकृष्णमय

भोपाल/छिन्दवाड़ा/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के नाम से भारत की पहचान दुनियाभर में बनी है। उन्होंने सृष्टि के उद्धार के लिए पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लिया, अपने जीवन में अनेक कष्ट सहे और दुष्टों का संहार कर जनता के लिए सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया। भगवान श्रीकृष्ण ने कारागार में जन्म लेने के बाद अपनी बाल्यकाल की लीलाओं के माध्यम से आमजन के कई कष्टों को मुस्कुराते हुए दूर किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य और संयम से काम लेने तथा कष्टों से निकलने का मार्ग खोजने की प्रेरणा दी। उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि के आश्रम में श्रीकृष्ण ने 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। श्रीकृष्ण के जीवन से शिक्षा के महत्व का संदेश मिलता है। सांदीपनि आश्रम में सुदामा जी के साथ उनकी मित्रता का प्रसंग आज भी प्रासंगिक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आख्यान पर्व कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

बाल-गोपालों को खिलाया माखन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का जलाभिषेक कर विधिवत पूजन-अर्चन किया। उन्होंने माखन-मिसरी से भरी मटकी फोड़कर राधारानी और बाल गोपाल की वेशभूषा में आए नन्हें बच्चों को माखन खिलाया तथा उन्हें उपहार देकर दुलार किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

मयूर नृत्य और मलखंभ ने मोहा मन

श्रीकृष्ण आख्यान की कला अभिव्यक्तियों के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न कला समूहों ने श्रीकृष्ण जन्म, श्रीकृष्ण लीला, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन लीला, कंस वध और गीता उपदेश सहित भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं का मंचन किया।

जबलपुर से आए श्री जुगलकिशोर नामदेव एवं साथी कलाकारों ने मयूर नृत्य और सुमधुर भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। भजनों की प्रस्तुतियों से मुख्यमंत्री निवास का वातावरण श्रीकृष्णमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर नजर आए।

कार्यक्रम में श्री भारत सिंह पालीवाल के निर्देशन में उज्जैन से आए खिलाड़ियों ने मलखंभ की प्रस्तुति दी। खिलाड़ियों के अद्भुत करतब देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मलखंभ खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को वैदिक घड़ी भी भेंट की गई।

भव्य तीर्थ के रूप में विकसित हो रहे श्रीराम-श्रीकृष्ण से जुड़े स्थान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित कर उन्हें जीवंत करने के लिए संकल्पित है। श्रीकृष्ण पाथेय में उज्जैन का सांदीपनि आश्रम, जानापाव, महिदपुर सहित अन्य तीर्थ स्थल शामिल हैं। इसी प्रकार संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से प्रभु श्रीराम से जुड़े चित्रकूट धाम को भी भव्यता के साथ विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के गौरवशाली अतीत से दुनिया को परिचित कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा त्योहारों और पर्वों को व्यापक स्तर पर हर्षोल्लास के साथ मनाने की शुरुआत की गई है।

विश्व बंधुत्व का संदेश देते हुए आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा भारत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अथक प्रयासों से भारत आज विश्व बंधुत्व का संदेश देते हुए आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है। हमारी संस्कृति अच्छाई बांटने वाली संस्कृति है और इसके वैभव को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए सरकार कटिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों पर युद्ध का संकट है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है। ग्रोथ रेट के मामले में भारत ने अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। भारत सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और विदेशी संबंधों को भी और मजबूत करेगी।

सुदर्शन चक्र और पांचजन्य शंख श्रीकृष्ण के चतुर्भुज रूप की शोभा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महर्षि सांदीपनि के जीवन और उज्जैन स्थित उनके आश्रम से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि आचार्य सांदीपनि का पहला आश्रम बनारस में था। इसके बाद वे परिवार सहित उज्जैन आए और यहां विद्यार्थियों को शिक्षा देना प्रारंभ किया। सांदीपनि आश्रम की शिक्षा पद्धति अपने समय में प्रसिद्ध और अद्भुत थी।

उन्होंने बताया कि तत्कालीन समय में गुजरात के प्रभाषपाटण, वर्तमान द्वारका क्षेत्र में जम जाति के आक्रांताओं का आतंक था। आचार्य सांदीपनि द्वारा उनके बच्चों को शिक्षा देने से इनकार करने पर आक्रांताओं ने उनके पुत्र को बंधक बना लिया। इसके बाद भी महर्षि सांदीपनि उज्जैन लौटकर कठिन परिस्थितियों में 11 वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षित करते रहे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने शिक्षा पूर्ण करने के बाद मथुरा जाकर जरासंध से युद्ध किया। आचार्य सांदीपनि के बताए अनुसार श्रीकृष्ण जानापाव गए और भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया। श्रीकृष्ण ने निश्चय किया कि वे अपने गुरु के पुत्र को जम आक्रांताओं से मुक्त कराकर गुरु दक्षिणा के रूप में सकुशल लौटाएंगे। युद्ध समाप्त कर लौटते समय समुद्र से उन्हें पांचजन्य शंख प्राप्त हुआ। सुदर्शन चक्र और पांचजन्य शंख भगवान श्रीकृष्ण के चतुर्भुज रूप की शोभा हैं।

ये रहे उपस्थित

जन्माष्टमी पर्व कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, पूर्व राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी, वरिष्ठ समाजसेवी श्री रघुनंदन शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, श्री रविन्द्र यति, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी सहित अनेक संत-वृंद, माताएं-बहनें, बाल-गोपाल, मुख्यमंत्री निवास के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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