अधिकारी कागजों में करते रहे विकास, बारिश में टापू बना कांदाढाना
सच की आंखें न्यूज़ तामिया। विकास की तस्वीर दिखाने वाले दावों के बीच तामिया क्षेत्र का कांदाढाना गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। रेनीखेड़ा पंचायत का यह गांव बारिश शुरू होते ही टापू में तब्दील हो जाता है। सड़क और नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो जाता है और नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का संपर्क लगभग कट जाता है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ता है या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को डोली के सहारे दुर्गम रास्ते व नदी पार कर अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसे हालात व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
बच्चों के टीकाकरण के लिए भी ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। बारिश में नदी का पानी बढ़ने पर कई बार उन्हें रास्ते से ही लौटना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया सवाल यह है कि जब ग्रामीण वर्षों से सड़क और पुल की मांग कर रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? बारिश में हर साल ग्रामीणों की परेशानी सामने आने के बावजूद यदि समय रहते स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण कर सड़क एवं पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने और बारिश के दौरान वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है।
