पी.जी.कॉलेज छिंदवाड़ा में आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत भाषण, निबंध और चित्रकला की जिला स्तरीय प्रतियोगितायें संपन्न


शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा में गत दिनों आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत भाषण, निबंध और चित्रकला की जिला स्तरीय प्रतियोगितायें संपन्न हुईं । भाषण प्रतियोगिता में शासकीय पेंचवेली महाविद्यालय परासिया के छात्र श्री चन्द्रभान साहू प्रथम, शासकीय महाविद्यालय सौंसर के छात्र  गौरव ददधाये व्दितीय और शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा की छात्रा  अक्षिता राय तृतीय स्थान पर रहीं, जबकि निबंध प्रतियोगिता में शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा के छात्र  मयंक कुमार विश्वकर्मा प्रथम, शासकीय महाविद्यालय उमरानाला की छात्रा  शिवानी डोंगरे व्दितीय और कैप्स महाविद्यालय पांढुर्णा के छात्र  निकेश जसुतकर तृतीय स्थान पर रहे । इसी प्रकार चित्रकला प्रतियोगिता में राजमाता सिंधिया शासकीय कन्या महाविद्यालय छिंदवाड़ा की छात्रा  अल्का बुनकर ने प्रथम, शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय पांढुर्णा के छात्र  मुकेश सिरसाम व्दितीय और शासकीय महाविद्यालय अमरवाडा की छात्रा  कोहिया जैन तृतीय स्थान पर रहीं ।जिला स्तर के विजेता प्रतिभागी अब संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता करेंगे ।
कार्यक्रम में शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा के प्राचार्य डॉ.अमिताभ पांडे ने सभी विजेता प्रतिभागियों को संभाग स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिये शुभकामनायें दीं। संयोजक डॉ.सुशील व्यौहार ने कहा कि विजेता प्रतिभागी संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में जीत दर्ज कर जिले का नाम रोशन करें। प्रो.अमर सिंह ने प्रतियोगियों को हर दिन बेहतर प्रदर्शन करने के लिये प्रेरित किया। कार्यक्रम में अतिथि वक्ता, पूर्व आकाशवाणी उद्घोषक व प्रसिध्द बुंदेली बोली के साहित्यकार  अवधेश तिवारी ने कहा कि भाषण के दौरान विद्यार्थियों में अंतर्मन के भाव सौंदर्य की शुचिता झलकना चाहिये। ख्यातिलब्ध चित्रकार  ध्रुव वानखेड़े ने कहा कि शब्द में ध्वनि और चित्र में प्रकाश की गति होती है, इसलिये इनके प्रयोग में आवश्यक सावधानी बरतना चाहिये। संस्कृत भाषा के विद्वान व वरिष्ठ साहित्यकार श्री नेमीचंद व्योम ने कहा कि जैसे जल के कण-कण से धारा बनती है, उसी तरह भाषा के एक-एक शब्द मिलकर राष्ट्र का श्रंगार करते हैं। युवा साहित्यकार  प्रत्यूष जैन ने कहा कि निबंध की लिखावट में नैसर्गिकता, संक्षिप्तता व स्वच्छता बहुत प्रभावित करती है। वरिष्ठ कवि  के.के.मिश्रा ने कहा कि कम शब्दों से गागर में सागर भर देना भाषण में सफलता का राज है। चित्रकार व युवा गीतकार  रोहित रूसिया ने कहा कि चित्र की भाषा के संदेश बहुआयामी होते हैं और प्रतीक रूप में उद्घाटित होते हैं। युवा कलाकार   रजत गढेवाल ने कहा कि किसी भी कला में कथ्य केंद्र में होना चाहिये। प्रतियोगिताओं में डॉ.डी.पी.अवस्थी और मेजर राकेश श्रीवास्तव ने निर्णायक की भूमिका का निर्वहन किया। स्पर्धाओं को सफल बनाने में प्रो.टीकमणि पटवारी, डॉ.जी.बी.डहेरिया, प्रो.सीमा सूर्यवंशी, प्रो.सुनीता मेश्राम, डॉ.माया साहू, डॉ.अर्चना भार्गव, डॉ.के.एल.झरबडे, डॉ.ऋतु शर्मा, डॉ.सुप्रिया साहू,  शैलेन्द्र मौर्य और अंकुर साहू का विशेष योगदान रहा।

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