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इस अवसर पर प्राचार्य श्री धारकर ने कहा कि हमारी संस्कृति में महिलाओं को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। हम महिलाओं की माता दुर्गा के रूप में पूजा करते हैं। उन्होंने सभी का आह्वान किया की किसी भी परिस्थिति में बाजार की ताकतों के प्रभाव में आकर महिलाओं को अपनी गरिमा और सम्मान के साथ समझौता नहीं करना चाहिये। महिलाओं को केवल ऊपरी दिखावे के स्थान पर अपने विचारों से आधुनिक बनना चाहिये। उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करें। किसी भी परिस्थिति में महिलाओं के प्रति किए जाने वाले दुर्व्यवहार के प्रति शून्य सहनशीलता की भावना होना चाहिये। उप प्राचार्य श्री देवेन्द्र तिवारी ने नारी-शक्ति और समाज के संबंधों को रेखांकित करते हुए विद्यालय के कार्यों में सभी महिला कर्मियों के समर्पण और सहयोग के प्रति आभार प्रकट किया । इस दौरान विद्यालय परिवार ने अपने भावों और सम्मान को प्रस्तुत करने के लिए सभी महिला सहकर्मियों को अभिनन्दन उपहार भेंट किये । विद्यालय के शिक्षक सर्वश्री राजनंद वर्मा, धनराज खरपुसे, रविन्द्र उपाध्याय व ताराचंद बिहारे ने लोकगीत, कविता, जागरूकता कथन और सुगम-गीत के संयोजन से कार्यक्रम को रसमय बनाया । विद्यालय के सभी शिक्षकों द्वारा महिलाओं के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम से सभी महिलाओं को भाव विहल कर दिया। सर्वश्री बिपिन झा, रामकृपाल जंघेला, कपिल साहू, दिनेश राम, बसंत पाटकर और हिमांशु जायसवाल द्वारा तैयार की गई कार्यक्रम की रूपरेखा को श्री नीलेश चौरे ने मंच पर संचालित किया ।


