सिविल अस्पताल पांढुर्णा में एक गर्भवती महिला का उपचार नहीं किये जाने संबंधी शिकायत पाई गई तथ्यहीन व निराधार


कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले द्वारा दिये गये निर्देशों के परिपालन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.जी.सी.चौरसिया ने जिले के विकासखंड पांढुर्णा के ग्राम बिछुआकला (मारूड़) की एक आदिवासी महिला श्रीमती कविता पति संदीप टेकाम से संबंधित शिकायत की जांच कराई गई । जांच में यह पाया गया कि गर्भवती महिला श्रीमती कविता टेकाम को सिविल अस्पताल पांढुर्णा में उपचार प्रदान किया गया तथा जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में रैफरल के दौरान प्रसूता महिला की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य थी । इस संबंध में प्राप्त शिकायत तथ्यहीन व निराधार है ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.चौरसिया ने बताया कि ग्राम बिछुआकला की गर्भवती महिला श्रीमती कविता टेकाम 14 मार्च को तृतीय त्रैमास में ए.एन.सी.चेकअप कराने के लिये सिविल अस्पताल पांढुर्णा ओपीडी में आई थी, जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा स्वास्य्य परीक्षण कर उसे समुचित उपचार प्रदान किया गया । ए.एन.सी.चेकअप के दौरान जांच में पाया गया कि गर्भवती महिला का बी.पी.बढ़ा हुआ है तो उसे बी.पी.की दवाईयां और आयरन व कैल्शियम के सप्लीमेंट लेने के लिये लिखा गया । स्वास्य्क परीक्षण के दौरान गर्भवती महिला को प्रसव दर्द के कोई भी संकेत व लक्षण नहीं पाये जाने पर उसे सिविल अस्पताल पांढुर्णा में भर्ती नहीं कराया गया । इसके बाद शाम को महिला का प्रसव होने के बाद उनके परिजनों द्वारा पुन: इस महिला को लाकर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया । जन्मे शिशु का वजन 1600 ग्राम होने के कारण महिला को प्राथमिक उपचार प्रदान करने के बाद जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा के लिये रैफर किया गया तथा रैफरल के दौरान प्रसूता महिला की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य थी । उन्होंने बताया कि खंड चिकित्सा अधिकारी पांढुर्णा को दिये गये निर्देशों के परिपालन में सिविल अस्पताल पांढुर्णा में पदस्थ स्त्री रोग विशेषज्ञ को सोनोग्राफी कार्य करने के निर्देश दिये गये हैं । 

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