जंगलों में अवैध कटाई के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। सरकार द्वारा करोड़ों रुपए का बजट प्रतिवर्ष पर्यावरण संरक्षण के लिए खर्च किया जाता है। वन विभाग द्वारा अधिकारी एवं कर्मचारियों का भारी आमला विभिन्न स्थानों पर वन संपदा की सुरक्षा के लिए नियुक्त कर रखा है, लेकिन अधिकारी सिर्फ अपने कार्यालयों तक ही सीमित रहते हैं। पर्यावरण में प्रकृति एक महत्वपूर्ण योगदान रखती
वन विभाग की लापरवाही और सेटिंग से जिसके कारण अवैध रूप से कटाई अधिक बढ़ जाती है। वन कर्मियों की लापरवाही के कारण विभिन्न स्थानों पर धड़ल्ले से हरे पेड़ों की कटाई हो रही है। जिसका सीधा नुकसान पर्यावरण एवं वन संपदा का हो रहा है।
जंगल से लकड़ियां काटना आपराधिक कृत्य
वाइल्ड लाइफ क्राईम कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व वॉलिंटियर महेश यादव के अनुसार वन्य क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ काटने वालों के खिलाफ वन अधिनियम 153 के अंतर्गत 6 माह की सजा या फिर ₹500 जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जागरूकता के अभाव में ग्रामीण अक्सर यह अपराध कर बैठते हैं।
ऐसा ही मामला लखनादौन वन परीक्षेत्र ग्राम पंचायत पहाड़ी के आसपास जंगल को किया तबाह बड़े बड़े पेड़ काट दिए और कितने ही सैकड़ों की संख्या में जंगल को साफ कर दिया गया जिसका जिम्मेदार पूरी तरह से वन विभाग के अधिकारी है जब वन कर्मचारियों के निवास जाकर देखा गया तो वहा ताला लगा हुआ है एवम ग्राम के लोगो से पूछने पर यह सामने आया है की कभी कोई कर्मचारी देखने तक नही आता शासन के ऐसे उदासीन कर्मचारी वन परिक्षेत्र का विनाश हो रहा है ऊपर की तस्वीरों को देखकर साफ पता चल रहा है की वन विभाग की लापरवाही से किस प्रकार वनों का विनाश हो रहा है ।

