शिक्षा से वंचित रह सकते हैं नन्हे मुन्ने
शिक्षा से वंचित रह सकते हैं नन्हे मुन्ने
जुन्नारदेव ----- भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के बाद भी ग्रामीण अंचलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है आज ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की योजनाएं पूरी तरह से विफल नजर आ रही है जहां अनेकों ग्राम ऐसे है जो वर्षों से सड़क की राह देख रहे हैं किंतु उन्हें आज तक पक्की सड़क पर चलने का सौभाग्य प्राप्त ही नहीं हुआ है जिससे ग्रामीणों के मन में भी शासन प्रशासन की योजनाओं के प्रतीक खास रोष व्याप्त है।
जुन्नारदेव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बदनूर ( नवेगांव) बोबडा से नवेगांव तक लगभग आधा किलोमीटर सड़क बनाने की राह ग्रामीण कई वर्षों से देख रहे हैं आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस ग्राम के ग्रामीणों को यह लगभग 500 मीटर सड़क की मूलभूत सुविधा से वंचित रहना पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम से नवेगांव तक जाने के लिए कोई सड़क नहीं है, ऐसी स्थिति में बारिश के दौरान कीचड़ हो जाने पर इस मार्ग से गुजरने वाले लगभग 20 से 25 ग्रामों के ग्रामीणों का आवागमन बाधित होता है, साथ-साथ स्कूली बच्चे भी स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं।
शिक्षा से वंचित रह सकते हैं नन्हे मुन्ने ----- बारिश के कर माह सड़क के अभाव में नन्हे मुन्ने बच्चे स्कूल पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करते हैं ऐसे में वह लगातार बारिश के दौरान स्कूल से दूरी बनाए रखते हैं जहां एक और स्कूल से दूरी बनाने पर शिक्षा की ओर से उनका रुझान कम हो रहा है वही बच्चे शिक्षा से भी वंचित रह सकते हैं इसकी भी आशंका बनी हुई है बच्चों के पालकों ने शासन प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों से ग्राम से नवेगांव तक सड़क निर्माण की मांग की है।
इन विशेष कार्य से जाना होता है नवेगांव बारिश में होती है परेशानी -ग्राम बदनूर बोबदा के ग्रामीण अपने ग्राम से नवेगांव तक अति आवश्यक कामों के लिए पहुंचते हैं जिनमें से बैक नवेगांव, थाना नवेगांव, बिजली अफिस नवेगाव, पोस्ट अफिस नवेगांव, स्कूल नवेगांव, रेल्वे स्टेशन नवेगांव, बिजली ऑफिस नवेगांव, बाजार नवेगांव, खाद बीज नवेगांव, कंट्रोल सोसायटी नवेगांव, पटवारी कार्य नवेगाव सहित अनेको मुख्य कार्यों के लिए ग्रामीण नवेगांव कच्ची सड़क से होते हुए पहुंचते हैं जिसमें परेशानियों का सामना करना होता है।

