कुंडा (चौरई)। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी तारण तरण जैन समाज कुंडा द्वारा पर्युषण पर्व के अवसर पर विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। जैन मंदिर प्रांगण से प्रारंभ हुई शोभायात्रा में समाज के सदस्य बड़ी श्रद्धा और उत्साह से शामिल हुए।
जैन समाज के प्रमुख कमलेश (पप्पू सेठ) एवं अमन जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। दिगंबर संप्रदाय में इसे 10 दिनों तक और श्वेतांबर संप्रदाय में 8 दिनों तक मनाने की परंपरा है।
पर्व के अंतिम दिन जैन समुदाय ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहकर एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हैं। इसका अर्थ है— यदि अनजाने में किसी को ठेस पहुंची हो तो विनम्र भाव से क्षमा करें और क्षमा प्राप्त करें। यही क्षमापना पर्युषण पर्व का मुख्य संदेश है।
समाज के सदस्यों ने बताया कि पर्युषण पर्व के प्रत्येक दिन का एक विशेष महत्व है—
पहले दिन क्रोध पर नियंत्रण,
दूसरे दिन मधुर व्यवहार,
तीसरे दिन वचनों की पूर्ति,
चौथे दिन वाणी पर संयम,
पांचवें दिन लालच व स्वार्थ से दूर रहना,
छठे दिन धैर्य व संयम,
सातवें दिन तपस्या व आत्म-संयम,
अष्टमी को दान,
नवें दिन निस्वार्थ भाव,
दसवें दिन पवित्रता और सद्गुणों का पालन।
अंतिम दिन ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहकर एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए पर्व का समापन किया जाता है। इसके उपरांत मंदिर में विधिवत पूजन, पात्रभावना एवं सामूहिक भोजन प्रसाद का आयोजन हुआ।
पर्युषण पर्व न केवल धार्मिक साधना है, बल्कि यह मानवता, करुणा और अहिंसा को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।
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