साइलेंसर की गड़गड़ाहट पर पुलिस का ब्रेक — सड़क पर पटाखा नहीं, कानून चलेगा!
छिंदवाड़ा | 18 जनवरी 2026 — अगर कोई यह समझता है कि तेज आवाज वाला साइलेंसर लगाकर सड़क पर “स्टाइल” दिखाना बहादुरी है, तो थाना देहात पुलिस ने उसे साफ संदेश दे दिया है—यह स्टाइल नहीं, सीधा कानून का उल्लंघन है और इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान में थाना देहात पुलिस ने एक बाइक चालक को तेज आवाज वाला अवैध साइलेंसर लगाकर वाहन चलाते हुए पकड़ा और मौके पर ही ₹5000 का चालान काट दिया। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिले भर में चल रही सख्ती का हिस्सा है, जिसमें यातायात नियम तोड़ने वालों पर बिना रियायत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक अजय पांडे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के मार्गदर्शन तथा नगर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना देहात प्रभारी गोविंद सिंह राजपूत के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, अभियान का मकसद केवल चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि सड़क पर शांति और सुरक्षा सबसे पहले है।
कार्रवाई के दौरान शालिक खान, पिता सफीक खान, उम्र 23 वर्ष, निवासी वर्षमान सिटी, पटवारी कॉलोनी, पाठाढाना को तेज आवाज वाला साइलेंसर लगाकर बाइक चलाते हुए रोका गया। जांच में पाया गया कि साइलेंसर नियमों के अनुसार नहीं था और उससे पटाखे जैसी तेज आवाज निकल रही थी, जो न सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी परेशानी का कारण बनती है। नियमों के तहत चालक पर ₹5000 का चालान किया गया।
पुलिस अब एक कदम आगे बढ़ते हुए उस व्यापारी की भी तलाश कर रही है, जिसने इस तरह का अवैध साइलेंसर बेचा। थाना प्रभारी का कहना है कि सिर्फ चलाने वाले ही नहीं, बल्कि अवैध उपकरण बेचने वालों पर भी कार्रवाई जरूरी है, ताकि समस्या की जड़ पर चोट की जा सके। यदि दुकानदारों पर सख्ती नहीं होगी, तो ऐसे साइलेंसर फिर बाजार में पहुंचते रहेंगे और सड़क पर वही शोर दोहराया जाएगा।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान पुलिस लगातार हेलमेट, ओवरस्पीड, बिना दस्तावेज वाहन चलाने और मॉडिफाइड साइलेंसर जैसे मामलों पर निगरानी बढ़ा रही है। पुलिस का साफ कहना है कि आगे भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे और नियम तोड़ने वालों को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।
महत्वपूर्ण बात यह भी है कि तेज आवाज वाले साइलेंसर सिर्फ कानूनी समस्या नहीं हैं, बल्कि अस्पतालों के पास, स्कूल इलाकों और घनी आबादी में यह शोर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए गंभीर परेशानी बन जाता है। कई बार यह सड़क पर घबराहट और दुर्घटना की वजह भी बनता है। इसलिए कानून ने ऐसे मॉडिफिकेशन पर स्पष्ट रोक लगा रखी है।
पुलिस की यह कार्रवाई एक चेतावनी है—सड़क पर रोमांच के नाम पर नियम तोड़ना अब महंगा पड़ेगा। अगर वाहन आपका है, तो जिम्मेदारी भी आपकी ही है।
मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
आपके इलाके में तेज आवाज वाले साइलेंसर और खतरनाक स्टंट पर पुलिस को और सख्ती करनी चाहिए या पहले दुकानदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

