कुएं का पानी बना मुसीबत! पानी पीते ही बिगड़ी 25 से ज्यादा ग्रामीणों की हालत, कुएं से निकला संदिग्ध पाउच

कुएं का पानी बना मुसीबत! पानी पीते ही बिगड़ी 25 से ज्यादा ग्रामीणों की हालत, कुएं से निकला संदिग्ध पाउच
सच की आंखें न्यूज़ किसनपुर (बुधवार): सोचिए, जिस पानी को लोग जीवन मानकर पीते हैं, वही पानी अचानक बीमारी और दहशत का कारण बन जाए तो क्या होगा? कुछ ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत किसनपुर में सामने आया, जहां कुएं का पानी पीने और उससे नहाने के बाद 25 से 30 ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ने की सूचना से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह ग्रामीणों ने गांव के सार्वजनिक कुएं से पानी भरकर दैनिक उपयोग में लिया। कुछ लोगों ने उस पानी का सेवन किया तो कई लोगों ने उसी पानी से स्नान किया। इसके कुछ ही समय बाद कई ग्रामीणों ने पानी से अजीब बदबू आने की शिकायत की। वहीं कुछ लोगों के हाथ-पैरों में खुजली, जलन और एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। देखते ही देखते गांव में चिंता का माहौल बन गया।

ग्रामीणों द्वारा जब दोबारा कुएं के पानी की जांच की गई तो उसमें झाग और फेस बनता दिखाई दिया। इसी दौरान कुएं से पानी निकालने पर एक बाल्टी में कथित रूप से जहरीले पदार्थ (पाइजन) का पाउच भी मिला। इतना ही नहीं, कुएं में मरी हुई मछली मिलने की बात भी सामने आई है। इसके बाद ग्रामीणों ने मामले की सूचना प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को दी।

सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम, बीएमओ और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की ओर से एसडीओ सीता मरकाम सहित अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने कुएं के पानी के नमूने जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच के लिए एहतियातन पांच एंबुलेंस भी गांव भेजी गईं।

हालांकि प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कई ग्रामीण अस्पताल जाने के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने खुद को सामान्य बताया। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बरतते हुए ग्रामीणों की निगरानी शुरू कर दी है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुएं का पानी किस कारण दूषित हुआ और ग्रामीणों में दिखाई दिए लक्षणों की वास्तविक वजह क्या है। प्रशासन का कहना है कि पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। तब तक ग्रामीणों को कुएं के पानी का उपयोग नहीं करने की सलाह दी गई है।
गांव में फैली इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा और जल स्रोतों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट का इंतजार अब पूरे गांव को है, क्योंकि उसी से सामने आएगा कि आखिर कुएं के पानी में ऐसा क्या था जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी।

मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
क्या गांवों के सार्वजनिक जल स्रोतों की नियमित जांच और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य कर दी जानी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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