सच की आंखें न्यूज़ | सौंसर/बोरगांव | जून 2026
कभी जिस जगह से पूरे बोरगांव की प्यास बुझती थी, आज वहीं सड़े हुए दूषित पानी की बदबू लोगों का दम घोंट रही है। मध्यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम (MPIDC) के सौंसर औद्योगिक क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट का बड़ा हिस्सा दूषित पानी के भराव से प्रभावित दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित कंपनियों से निकलने वाले अपशिष्ट जल की निकासी पहले नागपुर-छिंदवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के पास बनी पुलिया से होती थी। ग्रामीणों का दावा है कि निकासी मार्ग बंद होने के बाद दूषित पानी ग्रीन बेल्ट में जमा होने लगा, जिससे काले रंग का पानी, कचरा और तेज दुर्गंध पूरे क्षेत्र में फैल गई है।
हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों, राहगीरों और औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को इस बदबू से रोजाना दो-चार होना पड़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि कुछ मिनट भी वहां रुकना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो मच्छरों की संख्या बढ़ने से मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
ग्रामीण बताते हैं कि लगभग तीन वर्ष पहले भीषण गर्मी के दौरान ग्राम पंचायत ने इसी क्षेत्र में ट्यूबवेल लगाकर पूरे बोरगांव में पेयजल आपूर्ति की थी। उस समय यह स्थान स्वच्छ पानी का स्रोत माना जाता था, लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर लोग चिंता जता रहे हैं कि पर्यावरण के साथ-साथ भविष्य के जल स्रोत भी प्रभावित हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नजर नहीं आया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि दूषित पानी की तत्काल निकासी कराई जाए, पूरे क्षेत्र की पर्यावरणीय जांच कराई जाए तथा यदि किसी इकाई द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में MPIDC के क्षेत्रीय अधिकारी से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब सवाल केवल बदबू का नहीं, बल्कि पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और भविष्य के जल स्रोतों की सुरक्षा का भी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
📸 फोटो कैप्शन:
1. नागपुर-छिंदवाड़ा हाईवे किनारे ग्रीन बेल्ट में जमा दूषित पानी।
2. झाड़ियों के बीच काला पानी और जमा कचरा।
3. दूषित पानी के भराव से प्रभावित ग्रीन बेल्ट का दृश्य।
🗣️ मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
क्या औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वालों पर और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? अपने क्षेत्र में भी ऐसी कोई समस्या है तो कमेंट करके जरूर बताइए।
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