गौशाला संचालकों और गौसेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित, समस्याओं पर हुआ मंथन; गौमाता के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों पर दिया जोर
मनेश साहु संपादक 9407073701
सच की आंखें न्यूज़ छिंदवाड़ा। गौसेवा, गोवंश संरक्षण और गौशालाओं के उत्थान के उद्देश्य से गौ एवं गौशाला उत्थान संघ मध्यप्रदेश, जिला छिंदवाड़ा के सौजन्य से शहर के परासिया रोड स्थित पूजा श्री होटल में पहली बार गौशाला संचालक सम्मेलन एवं गौसेवा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छिंदवाड़ा, पांढुर्णा एवं सिवनी जिले के गौशाला संचालकों और गौसेवकों ने सहभागिता की। समारोह में गौसेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाले गौशाला संचालकों एवं गौसेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, गौशालाओं के संचालन में आ रही समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन-अर्चन के साथ हुआ। समारोह में खंडवा से पधारे स्वामी सुखदेव बाबा, देवास से साध्वी कृष्णा दीदी, आगर मालवा से राधेश्याम विश्वकर्मा, शाजापुर-मक्सी से प्रमोद मेहता, छिंदवाड़ा से दामोदर भोजने महाराज, नरेंद्र साहू, रामजी किरार, संजीव राऊत, गयाप्रसाद सोनी एवं सफर जौनपुरी सहित अन्य अतिथि और गौसेवा से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
गौसेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
समारोह के दौरान गौमाता की सेवा, गोवंश संरक्षण और गौशालाओं के संचालन में योगदान देने वाले गौशाला संचालकों एवं गौसेवकों को मंच से प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले गौसेवकों में उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य गौसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों का उत्साहवर्धन करना और उनके प्रयासों को समाज के सामने लाना रहा।
वक्ताओं ने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। निराश्रित गोवंश की देखभाल, चारा-पानी की व्यवस्था और बीमार पशुओं के उपचार जैसे कार्यों में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है।
गौसेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं : स्वामी सुखदेव बाबा
समारोह को संबोधित करते हुए खंडवा से पधारे स्वामी सुखदेव बाबा ने कहा कि गौसेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग पत्थर और मूर्तियों में भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन जीवित प्राणियों में ईश्वर के दर्शन कर उनकी सेवा करने की भावना को भी मजबूत बनाने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति में गौमाता का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है, इसके बावजूद आज अनेक स्थानों पर गोवंश सड़कों पर भटकने और उचित देखभाल के अभाव में परेशान होने को मजबूर है। गोवंश के साथ होने वाली हिंसा एवं दुर्व्यवहार की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि गौमाता की रक्षा, संरक्षण और सम्मान के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना चाहिए। सरकार को भी गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की दिशा में पहल करनी चाहिए। गौसंरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज के सभी वर्गों को इस कार्य से जोड़ने की आवश्यकता है।
गौशाला संचालकों ने रखीं अपनी समस्याएं
सम्मेलन में गौशाला संचालकों ने गौशालाओं के संचालन, गोवंश के रखरखाव तथा आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। अतिथियों ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और कई विषयों पर मौके पर ही मार्गदर्शन प्रदान किया। इस दौरान गौशालाओं के बेहतर संचालन, गौसेवा के कार्यों को मजबूत बनाने तथा आपसी सहयोग एवं समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि गौशालाओं के सुचारु संचालन और निराश्रित गोवंश की उचित देखभाल के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। समाज, गौसेवकों और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से ही गौसंरक्षण के कार्यों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है।
गौसंरक्षण के लिए एकजुट होने का आह्वान
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने अपने उद्बोधन में गौमाता के संरक्षण एवं संवर्धन, गौशालाओं के विकास और गौसेवकों के योगदान की सराहना की। समारोह के माध्यम से गौसेवा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, गौशाला संचालकों की समस्याओं को सामने लाने और गोवंश की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर लोकहित जनगणना समिति के पदाधिकारी एवं सदाशिव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गौसेवा से जुड़े लोगों ने गौमाता के संरक्षण, निराश्रित गोवंश की देखभाल और गौशालाओं के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया।

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