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मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर से कृष्णमृग रेस्क्यू अभियान का किया अवलोकन


मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर से कृष्णमृग रेस्क्यू अभियान का किया अवलोकन

शाजापुर में 31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान, दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य

किसानों की फसलों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव संरक्षण पर जोर

शाजापुर/छिंदवाड़ा, 28 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाजापुर जिले के ग्राम रंथभंवर पहुंचकर प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन के तहत कृष्णमृग एवं नीलगाय के रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का अवलोकन किया। उन्होंने हेलीकॉप्टर से अभियान की गतिविधियों का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से प्रगति एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण के साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों की फसलों को जंगली जानवरों, विशेषकर कृष्णमृग एवं नीलगाय से होने वाले नुकसान से बचाने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि शाजापुर जिले में किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष बोमा पद्धति से कृष्णमृग एवं नीलगाय के रेस्क्यू की पहल शुरू की गई थी। इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम की सहायता से वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है। रेस्क्यू के दौरान वन्यजीवों को चोट न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में यह अभियान 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक शाजापुर जिले से लगभग 1,236 से अधिक कृष्णमृगों एवं नीलगाय का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।

रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों को श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट सहित निर्धारित वन क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। वन्यजीवों के परिवहन के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। साथ ही पशु चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।

दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हेलीकॉप्टर की सहायता से बोमा पद्धति पर आधारित वन्यजीव रेस्क्यू का यह अभियान दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने अभियान में जुटे वन विभाग और प्रशासन की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस परियोजना की सफलता से अन्य राज्यों को भी ऐसी पहल करने की प्रेरणा मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति के माध्यम से किए जा रहे कृष्णमृग एवं नीलगाय के रेस्क्यू कार्य का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने अभियान में जुटी वन विभाग एवं प्रशासनिक टीम के साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया।

जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर शाजापुर विधायक अरुण भीमावद, कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया, वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, मुख्य वन संरक्षक डॉ. किरण बिसेन, कलेक्टर डॉ. परीक्षित संजयराव झाड़े, पुलिस अधीक्षक प्रियंका शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीणजन मौजूद रहे।

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