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कार्यशाला के संयोजक डॉ.विजय कलमधार ने बताया कि विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर श्री मिश्र ने कार्यशाला में कहा कि किसी भी क्षेत्र में नवीन ज्ञान की खोज और पुराने सिध्दांतों का वैज्ञानिक पध्दतियों द्वारा पुनः परीक्षण शोध प्रविधि कहलाती है । इस प्रविधि के अंतर्गत विषय का निर्धारण, शोध समस्या का निर्धारण, संबंधित साहित्य का व्यापक सर्वेक्षण, परिकल्पना का निर्माण, शोध अभिकल्प की रूपरेखा तैयार करना, तथ्यों का संकलन और उनका सारणीकरण, तथ्यों का विश्लेषण इन सभी के द्वारा मूल्यांकन व निष्कर्ष पर पहुंचा जाता है । कार्यशाला के संयोजक डॉ.कलमधार ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि शोध विषय का व्यापक होना आवश्यक नहीं, बल्कि विषय का सूक्ष्मता के साथ परीक्षण कर अनुशीलन, विश्लेषण और व्याख्या द्वारा निष्कर्ष प्रतिपादित किये जाते हैं। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.सीताराम शर्मा ने कहा कि शोध के लिये शोधार्थी को चयनित विषय की समस्या की प्रासंगिकता को भी देखा जाना चाहिये । प्रस्तावित समस्या से क्या लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, इस पर भी विचार विमर्श करना आवश्यक है । अंत में सुश्री रेणुका पोफली ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यशाला में प्रोफेसर सुरेश प्रसाद अहिरवार, डॉ.श्रीपाद आरोनकर, श्री ढालसिंह गौतम, डॉ.छविनम श्रीवास्तव, श्री शोभाराम जम्होरे, प्रियंका पाठक, नीता वर्मा, डॉ.ओमकार बाविष्टाले, डॉ.रोहित कुमार सिंह, प्रो.पूनम उसरेठे, एकता चौरसिया, रजीना खान, नीता मालवीय, रत्नेश्वर दुबे, पायल राय, नीलोफर खान, अदिति लांबा व निदा खान के साथ ही बड़ी संख्या में छात्रायें उपस्थित थी ।


