पुलिस-आरटीओ की अनदेखी, अमानवीय ढंग से रोज भरकर ले जाए गए मजदूर
अधिकारियों की लापरवाही से उमरेठ में नाबालिग व बुजुर्ग महिलाएँ मजदूरी पर ढोई जाती रहीं
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सच की आंखे, उमरेठ।
उमरेठ तहसील मुख्यालय में बीते मंगलवार, दिनांक 09 सितम्बर 2025 को मानवता को शर्मसार कर देने वाला दृश्य सामने आया। प्रतिदिन की तरह उस दिन भी लगभग 2 दर्जन से अधिक वाहन नाबालिग बच्चों, महिलाओं व बुजुर्ग महिलाओं को पिकअप व अन्य छोटे मालवाहक वाहनों में ठूंस-ठूंस कर मजदूरी के लिए ले जाते हुए देखे गए।
मजदूरों को ढोने का यह तरीका अमानवीय माना गया। मजदूर दलालों द्वारा महिलाओं और नाबालिग बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ढोकर काम पर भेजना श्रम कानूनों का घोर उल्लंघन साबित हुआ।
स्थानीय नागरिकों ने इस दृश्य पर गहरी चिंता जताई थी और तत्काल प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। लोगों का कहना था कि आवश्यक है कि स्थानीय पुलिस और जिला परिवहन अधिकारी (आर.टी.ओ.) इस मामले पर संज्ञान लेते हुए दोषियों पर कठोर कदम उठाएँ।
यह घटना मानवाधिकार और कानून व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़े कर गई।

