अवैध रेत खनन पर अधिकारियों का सिर्फ दिखावा, माफिया बेखौफ जारी रखे हैं कारोबार
अधिकारी–ठेकेदार गठजोड़ के चलते कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में, जमीन पर नहीं दिखता असर
मुखबिर नेटवर्क से पहले ही मिल जाती है सूचना, इसलिए अवैध रेत परिवहन पर नहीं लग पा रहा अंकुश
छिंदवाड़ा/जुन्नारदेव। जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेत माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत है कि इसमें कई अधिकारी, ठेकेदार और उनके कथित मुखबिर मिलीभगत से काम कर रहे हैं। यही कारण है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रह जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, रात्रि के समय जगह–जगह पर रेत से भरे ट्रैक्टरों को रोकने के बजाय अधिकारी और ठेकेदारों के लोग मिलकर रास्ते क्लियर करते हैं। बताया जा रहा है कि मुखबिरी का पूरा सिस्टम चलाया जाता है, जो खनिज, राजस्व और परिवहन विभाग की हर गतिविधि पहले ही माफिया तक पहुंचा देता है।
कुछ किसानों ने यह तक आरोप लगाए कि रेत माफिया की भुगतान लाइन “ऊपर तक” पहुंचती है, इसलिए उन पर कार्रवाई करना किसी विभाग के बस की बात नहीं। कई ग्रामीणों ने कहा—“हम आदिवासी हैं, हमारी कोई सुनवाई नहीं होती, हमारे सामने अधिकारी भी असहाय दिखते हैं।’’
छिंदवाड़ा जिले सहित विभिन्न तहसीलों में समय–समय पर छापेमारी और कार्रवाई की खबरें जरूर आती हैं, लेकिन धरातल पर अवैध रेत परिवहन उसी गति से चलता रहता है। ऐसे में ग्रामीणों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अवैध उत्खनन खुलेआम जारी है तो कार्रवाई आखिर किसके लिए हो रही है—माफिया को बचाने के लिए या जनता को दिखाने के लिए? ग्रामीणों ने मांग की है कि जिले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और अवैध रेत उत्खनन में शामिल अधिकारी–ठेकेदार गठजोड़ को उजागर करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए, अन्यथा यह समस्या और गहराती जाएगी।

