करोड़ों की तहसील भवन निर्माण में खुला कानून उल्लंघन, श्रमिकों की जान जोखिम में
👉 बिना सुरक्षा उपकरण बन रही सरकारी तहसील बिल्डिंग, प्रशासन की भूमिका सवालों में
जुन्नारदेव। नगर के वेलफेयर संगम गुलाई, वार्ड क्रमांक 13 के समीप राजस्व विभाग के लिए बन रही नई तहसील कार्यालय भवन के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएँ और लापरवाही सामने आई हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस महत्वपूर्ण सरकारी इमारत में निर्माण के शुरुआती चरण से ही श्रमिकों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना घटित होने की आशंका बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार यह निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पीआईयू विभाग के माध्यम से परासिया की एक निर्माण कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। वर्तमान में निर्माण स्थल पर ग्राउंड लेवल पर प्लिंथ बीम एवं फुटिंग कास्टिंग का कार्य प्रगति पर है। इस दौरान भारी और मोटी लोहे की सरिया का उपयोग खुले तौर पर किया जा रहा है, लेकिन श्रमिकों को बिना किसी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के ही जोखिम भरे कार्य में लगाया गया है।
निर्माण स्थल पर हेलमेट, सुरक्षा चश्मे, दस्ताने, स्टील-टो जूते जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण पूरी तरह नदारद हैं। आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक फर्स्ट एड किट भी मौके पर उपलब्ध नहीं है। हैरानी की बात यह है कि निर्माण कंपनी द्वारा स्थल पर निर्माण कार्य से संबंधित कोई सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (BOCW) अधिनियम के प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। यह अधिनियम निर्माण कार्य के दौरान हेलमेट, सुरक्षा चश्मे, दस्ताने और स्टील-टो जूते जैसे सुरक्षा साधनों की अनिवार्यता तय करता है, ताकि श्रमिकों को सिर, आंख, हाथ और पैरों में गंभीर चोट से बचाया जा सके।
प्रारंभिक कॉलम कास्टिंग जैसे अत्यंत जोखिम भरे कार्य में भी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जो निर्माण कंपनी की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इस पूरे मामले में ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि बिना निरीक्षण और निगरानी के निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल निर्माण स्थल का निरीक्षण कर कार्य को रोकते हुए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तथा जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी श्रमिक की जान से खिलवाड़ न हो और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

