लावारिस मिठाई से मौत, हादसा या गहरी साजिश?
थैली में रखी मिठाई बनी ज़हर, एक की मौत—पुलिस जांच में
बिना पोस्टमार्टम दाह संस्कार पर सवाल, मिठाई कांड से हड़कंप
*♻️जुन्नारदेव -*
नगर के तामिया मार्ग पर स्थित एक शासकीय कार्यालय के पास रखी हुई एक लावारिस थैली में रखी हुई मिठाई के सेवन कर लिए जाने से एक की मौत हो गई तो वही चार लोगों की तबीयत बिगड़ जाने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसमें दो की हालत अब तक गंभीर बनी हुई है। इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस विभाग और जिले का खाद्य विभाग अमला सक्रिय हो गया। पुलिस ने चौकीदार दसरू यदुवंशी के मृत्यु होने के बाद मर्ग कायम किया है तो वहीं दूसरी ओर जिला कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग ने जुन्नारदेव पहुंचकर शहर के लगभग समस्त मिष्ठान प्रतिष्ठानों से सैंपल ले लिया है। इस मामले की पड़ताल किए जाने के बाद लगभग यह स्थिति सामने आ रही है कि यह मामला किसी भी प्रकार से विषाक्त मिठाई का न होकर किसी गहरी साजिश का हो सकता है ? हालांकि इस मामले में पुलिस ने इस मिठाई के डब्बे में रखी शेष बची मिठाई को जप्त कर उसे जांच हेतु प्रयोगशाला में भेजने की बात कही है। इधर दूसरी तरफ इस डब्बे की मिठाई का सेवन करने के फलस्वरुप मृतक दसरू यदुवंशी का अंतिम संस्कार उसके परिजनों के द्वारा कर दिया गया है, तो वहीं अन्य चार बीमार लोगों में से दो की स्थिति छिंदवाड़ा में गंभीर बनी हुई थी जबकि अन्य दो अब खतरे से बाहर बताई जा रहे हैं। इस बहुचर्चित मामले में कथित तौर पर सिर्फ मिठाई के दूषित करार दिए जाने मामले की इतिश्री नहीं की जानी चाहिए बल्कि मामले की तह तक पहुंच कर इस बात की कोशिश की जानी चाहिए कि इसमें किसी भी प्रकार की कोई साजिश तो नहीं रही थी।
*🧐यह है मामला-*
नगर के तामिया मार्ग पर स्थित पी एच ई के कार्यालय के समीप किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा भूलवश या जानबूझकर एक थैली को रखा गया था, जिसमें एक मिठाई का डब्बा सहित कुछ हरी सब्जियां मौजूद थी। इस लावारिस राखी थैली में से मिठाई का डब्बे में से कुछ मिठाई को पी एच ई विभाग में पदस्थ चौकीदार दशुरू यदुवंशी के द्वारा सेवन किया गया जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे स्थानीय अस्पताल में दाखिल करा दिया गया। जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था तो वहीं इसी डिब्बे में रखी शेष मिठाई को वहां पर हाथ ठेले में दुकान संचालन करने वाले एक परिवार की महिला सदस्य के द्वारा अपनी दो पुत्री व ससुर तथा स्वयं के द्वारा इसका सेवन किया गया जिससे उनकी भी हालत बिगड़ गई और उन्हें भी उपचार हेतु अस्पताल ले जाया गया जिनमें से दो लोगों को फौरी तौर पर उपचार किया गया जबकि शेष दो को छिंदवाड़ा रेफर किया गया। जहां पर इनका इलाज अभी चल रहा है।
*🧐हादसा या साजिश❓---*
नगर के तामिया सड़क मार्ग पर स्थित पी एच ई विभाग के कार्यालय के ठीक पास में किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा अपनी थैली को इस तरह लावारिस छोड़कर चले जाना और उसकी तीन दिनों तक सुध नहीं लेना किसी साजिश की ओर इशारा करता है। दरअसल यह माना जा सकता है कि इस मिठाई के डब्बे में किस प्रतिष्ठान का नाम अंकित नहीं है और इस तरह की मिठाई का स्थानीय मिष्ठान विक्रेताओं के द्वारा निर्माण भी नहीं किया जाता है। सोशल मीडिया पर आई इस मिठाई और उसके डब्बे की मिठाई का सेवन कर लिए जाने के बाद के घटनाक्रम को लेकर लोगों में जन चर्चा है कि जब यह मिठाई विषाक्त होती तो फिर अन्य स्थानों से भी अन्य लोगों के द्वारा सेवन किए जाने के बाद बीमार होने के कई मरीज अस्पताल पहुंच सकते थे, लेकिन सिर्फ इस एकमात्र डिब्बे की मिठाई खाने से ही एक व्यक्ति की मौत और चार का गंभीर रूप से बीमार हो जाना स्पष्ट कर रहा है कि इस मिठाई में कुछ कथित तौर पर कुछ मिलाकर तो नहीं रखा गया है। यहां पर महत्वपूर्ण यह भी है कि लगभग ढाई सौ ग्राम वाले इस मिठाई के डिब्बे में लगभग आठ पीस मिठाई के रखे गए होंगे, जिनमें प्रत्येक पीस में लगभग 3-3 काजू के पीस लगाए गए थे। वर्तमान समय में एक काजू लगभग ₹3 की लागत का है। इस तरह से इस ढाई सौ ग्राम के इस डब्बे में 24 से 25 नग काजू लगाए गए जिनकी कीमत ₹3 प्रति काजू की औसत दर से लगभग 72 रुपए हो रही है। वर्तमान दौर में किसी भी मिष्ठान विक्रेता के द्वारा किसी एक मिठाई के पीस पर तीन-तीन काजू लगाकर बेचना वर्तमान के महंगाई के युग में असंभव है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा कोई विशेष मकसद से ही कथित तौर पर मिठाई में कुछ मिलावट करके जानबूझकर किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करके रखे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि आसपास के किसी भी क्षेत्र से दूषित मिठाई से पीड़ित होने के कहीं कोई और कोई घटना या समाचार नहीं मिल रहे हैं और ना ही यहां के शासकीय चिकित्सालय सहित अन्य किसी चिकित्सक के पास इस तरह का मरीज बीते 72 घंटे में नहीं पहुंचा है। इसीलिए यह आशंकाएं बलवती हो रही है कि दुर्भावनावश किसी अज्ञात व्यक्ति ने अपना कोई मकसद पूर्ण करने की विशेष इरादे से यह मिठाई में कुछ मिलाकर रख दिया हो ? हालांकि पुलिस ने इस मिठाई के दो पीस को जप्त कर लिया है जिसका परीक्षण प्रयोगशाला में होने के बाद परिणाम सामने आने पर ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस मिठाई में कुछ मिलाकर उसे दूषित किया गया है या फिर मिठाई के विनिर्माण किए जाते समय ही कोई त्रुटि की गई है। इस मामले में खाद्य विभाग के अनुभवी अधिकारियों का यह मानना है कि इस तरह की मिठाई का इस क्षेत्र में निर्माण नहीं होता है और मिठाई को देखकर यह आसानी से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि वह पुरानी या दूषित हो गई हो। देखने में यह मिठाई ताजी दिख रही है। मिठाई के डिब्बे के इस एकमात्र मामले के अलावा इस संपूर्ण क्षेत्र में दूषित मिठाई की कोई भी घटना या सूचना का ना मिलना भी किसी गहरी साजिश के होने की संभावनाओं को बल दे रहा है।
*🧐इलाके में सीसीटीवी की ना मौजूदगी.....*
इस मामले में साजिश की की ओर सी घूमने का यह भी प्रमुख कारण माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में कोई भी सीसीटीवी मौजूद नहीं है जिसके कारण यदि कहीं कोई व्यक्ति को टारगेट बनाकर किसी ने यह साजिश रची हो तो उसका खुलासा होना आसान नहीं होगा। जबकि तामिया सड़क मार्ग का यह व्यस्ततम क्षेत्र शाम के बाद लगभग सूना हो जाता है। यहां पर नगर पालिका और एमपीइबी के भी आसपास में कार्यालय हैं।
*🧐बगैर पोस्टमार्टम के ही किया गया दाह संस्कार, अब सबूत जुटाना होगा मुश्किल❓*
मिठाई के डिब्बे से मिठाई खा लिए जाने के बाद पी एच ई विभाग में कार्यरत दसरू यदुवंशी की हालत बिगड़ने के बाद उसे जुन्नारदेव के सामुदायिक अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां पर उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया जहां से उसके परिजनों ने अपनी ही गारंटी पर जिले के एक नामचीन अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती कराया गया जहां पर रविवार तड़के को उसकी मौत हो गई। आनन-फानन में अस्पताल प्रबंधन के द्वारा कथित तौर पर परिजनों से पोस्टमार्टम न किए जाने का पत्र लिखाकर लेने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जहां से कुछ देर के बाद उसका दाह संस्कार भी कर दिया गया। अब ऐसी परिस्थितियों में मृतक की मृत्यु का कारण जानने में अहम कड़ी साबित होने वाला पोस्टमार्टम और उसमें निकलने वाला बिसरा पुलिस को प्राप्त ही नहीं हो सकेगा जिसके कारण इस संवेदनशील मामले में मौत के कारण तक पहुंचने में पुलिस को भी खासी मशक्कत करनी होगी।
*🧐अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही या फिर साजिश❓*
जिले के एक इस नामचीन अस्पताल में रविवार को तड़के दसरू यदुवंशी की मौत हो जाने के बाद यह स्पष्ट हो चुका था कि पीड़ित की मौत किसी विषाक्त वस्तु के सेवन से हुई है। अस्पताल के चिकित्सकों के द्वारा मृतक की इस मौत को संदेहास्पद करार देते हुए तत्काल ही पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी, लेकिन यहां पर अस्पताल प्रबंधन के द्वारा कथित तौर पर लापरवाही बरती गई है जिसके द्वारा पुलिस को सूचना न देते हुए बगैर पोस्टमार्टम के ही शव परिजनों को अंतिम संस्कार हेतु दिया जाना किसी गहरी साजिश को रचना या उससे बचने की संभावना को बल देता है। शासकीय नियमानुसार किसी भी संदेहास्पद मामले में मृत्यु पर चिकित्सक या अस्पताल के द्वारा स्थानीय पुलिस को तहरीर भेजना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा ना किया जाना अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को इंगित कर रहा है। इस मामले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा शासकीय नियमों का हवाला देते हुए बताया गया कि परिजनों के द्वारा इस मामले में पोस्टमार्टम कराए बगैर ही शव उन्हें सौंप दिए जाने का पत्र अस्पताल प्रबंधन को दिया गया था। इसीलिए अस्पताल प्रबंधन के द्वारा बगैर पोस्टमार्टम के यह शव परिजनों को अंतिम संस्कार हेतु सोपा गया है। सीएमएचओ में इस मामले में किसी भी प्रकार से अस्पताल प्रबंधन को दोषी नहीं मानते हुए क्लीन चिट दी है। इस बेहद संवेदनशील मामले में बगैर शव परीक्षण के ही शव को परिजनों को सौंप कर उसका अंतिम संस्कार कर दिए जाने से अब इस मामले की जांच में गहने पेंच फंस सकते हैं। क्योंकि इस मामले में ऐसा माना जा रहा है कि अज्ञात व्यक्ति के द्वारा मिठाई में कुछ मिलाकर किस व्यक्ति को टारगेट किया गया था उसकी जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इस मामले में अब खाद्य विभाग के साथ-साथ पुलिस विभाग के लिए भी मामले के अंतिम निष्कर्ष को निकालने में मुश्किलें अब बढ़ती हुई नजर आ रही है।

