सच की आंखें बालाघाट जिले में खेती में बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और समय पर कृषि कार्यों को पूरा करने की चुनौती के बीच जिले के किसान अब आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और नवीन कृषि यंत्रों की उपलब्धता से किसानों में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति के प्रति तेजी से जागरूकता बढ़ रही है।
इसी क्रम में कटंगी विकासखंड के ग्राम कामठी के प्रगतिशील कृषक श्री देवीप्रसाद भगत ने अपने 15 एकड़ खेत में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से डीएसआर पद्धति से धान की बुआई कर एक मिसाल पेश की है। इतने बड़े रकबे में आधुनिक तकनीक से धान की सीधी बुवाई कर उन्होंने यह साबित किया है कि वैज्ञानिक खेती के माध्यम से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
श्री देवीप्रसाद भगत का कहना है कि पारंपरिक धान रोपाई पद्धति में मजदूरों की आवश्यकता अधिक होती है, जबकि वर्तमान समय में मजदूरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बन गई है। सुपर सीडर मशीन से डीएसआर पद्धति अपनाने पर न केवल समय की बचत हुई, बल्कि रोपाई, नर्सरी तैयार करने और अतिरिक्त श्रम पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो गया है।
इसी तरह ग्राम सावरी के कृषक राधेलाल भैरम एवं देवकरण भैरम ने भी अपने खेतों में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई कर आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति अपनी सकारात्मक सोच का परिचय दिया है। दोनों किसानों ने बताया कि मशीन से बुवाई करने पर कम समय में अधिक क्षेत्र कवर हो जाता है तथा फसल की शुरुआती बढ़वार भी बेहतर रहती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डीएसआर पद्धति धान उत्पादन की एक उन्नत तकनीक है, जिसमें खेत में सीधे बीज की बुवाई की जाती है। इस पद्धति से पानी की बचत होती है, श्रम लागत कम होती है तथा समय पर बुवाई होने से फसल की उत्पादकता में भी वृद्धि की संभावना रहती है। इसके साथ ही खेत की मिट्टी की संरचना और उर्वरता बनाए रखने में भी यह तकनीक सहायक सिद्ध हो रही है।
कृषि विस्तार अधिकारी सुश्री वंदना धुर्वे ने बताया कि कटंगी क्षेत्र में किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर डीएसआर तकनीक अपनाए जाने से अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। कृषि विभाग का मानना है कि यदि अधिक से अधिक किसान इस पद्धति को अपनाते हैं तो खेती की लागत कम होने के साथ-साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
प्रगतिशील किसानों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने से यह स्पष्ट हो रहा है कि जिले में कृषि अब परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक एवं यंत्रीकृत खेती की ओर तेजी से अग्रसर है। डीएसआर पद्धति का बढ़ता दायरा जिले में कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है।
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