सच की आंखें
बालाघाट। संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने केंद्र सरकार के पिछड़ा वर्ग मंत्रालय एवं मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को पत्र प्रेषित कर राजा भोज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उनके सामाजिक वर्ग और बालाघाट क्षेत्र से उनके संबंधों को लेकर जांच एवं स्पष्टीकरण की मांग की है। श्री समरीते ने अपने पत्र में कहा है कि ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार राजा भोज मालवा क्षेत्र के परमार वंश के शासक थे तथा उनका संबंध क्षत्रिय वर्ण से था। उन्होंने कहा कि राजा भोज का संबंध न तो सीपी एंड बरार क्षेत्र से था और न ही विदर्भ क्षेत्र से। ऐसे में राजा भोज की विरासत के आधार पर पिछड़ा वर्ग की पहचान स्थापित करने अथवा शासकीय लाभ प्राप्त करने के दावों की वैधानिक समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि बालाघाट जिले सहित प्रदेश के उन सभी मामलों की जांच कराई जाए, जहां राजा भोज को अपना आदर्श बताने वाले व्यक्तियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। यदि किसी स्तर पर ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत दावे कर लाभ लिया जा रहा हो तो संबंधित जाति प्रमाण-पत्रों की विधिसम्मत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। श्री समरीते ने कहा कि परमार वंश के अनेक राजपूत परिवार बालाघाट जिले में निवासरत हैं, जिन्हें किसी प्रकार की पिछड़ा वर्ग संबंधी सुविधा प्राप्त नहीं होती। इसलिए इस विषय में उत्पन्न भ्रम और विवाद का समाधान तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजा भोज भारत के महान, न्यायप्रिय एवं लोककल्याणकारी शासकों में से एक थे और उनका सम्मान पूरे देश को करना चाहिए। किंतु बालाघाट जिले के इतिहास और विकास में योगदान देने वाले स्थानीय महापुरुषों को भी समान सम्मान मिलना चाहिए। श्री समरीते ने कहा कि बालाघाट क्षेत्र के विकास में दानवीर दीवान बहादुर मुलना का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन समय के साथ उनके कार्यों को भुला दिया गया है। इसी प्रकार रामबाबू नगपुरे ने मोतीतालाब सहित अनेक संपत्तियां समाजहित में दान की थीं, किंतु उनके योगदान को भी अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि बालाघाट के लोगों को राजा भोज का सम्मान अवश्य करना चाहिए, क्योंकि वे भारतीय इतिहास के महान शासकों में से एक थे। लेकिन साथ ही जिले के उन महापुरुषों को भी याद रखा जाना चाहिए जिन्होंने सीधे तौर पर बालाघाट के विकास, समाजसेवा और जनकल्याण में अपना योगदान दिया। विशेष रूप से दानवीर दीवान बहादुर मुलना एवं रामबाबू नगपुरे जैसे व्यक्तित्वों के कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि स्थानीय इतिहास और समाज के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ सके।
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