रोपा पद्धति छोड़ डीएसआर को अपनाया, 20 एकड़ में सुपर सीडर से धान की बोनी कर बने मिसाल


   सच की आंखें 

बालाघाट जिले में खेती में बदलती तकनीकों के साथ जिले के किसान भी अब आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विकासखंड लालबर्रा के ग्राम खमरिया के प्रगतिशील कृषक श्री चैनलाल टेंभरे एवं श्री धनलाल टेंभरे ने इस वर्ष पारंपरिक धान रोपा पद्धति को छोड़कर सुपर सीडर मशीन से डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक अपनाते हुए 20 एकड़ क्षेत्र में धान की बोवाई की है। बोवाई के कुछ ही दिनों बाद खेतों में धान का बीज पूरी तरह अंकुरित हो गया है, जिसे देखकर किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं।

     कृषक श्री चैनलाल टेंभरे ने बताया कि हर वर्ष धान की रोपाई में अधिक मजदूर, समय और खर्च लगता था। बदलते समय में मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत को देखते हुए उन्होंने इस बार सुपर सीडर से डीएसआर पद्धति अपनाई। इस तकनीक से एक ही बार में बीज और उर्वरक की बुवाई हो जाती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

       किसानों का कहना है कि खेत में धान का समान एवं बेहतर अंकुरण देखकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्हें उम्मीद है कि फसल की अच्छी बढ़वार के साथ उत्पादन भी बेहतर मिलेगा। डीएसआर पद्धति से खेत में नमी का बेहतर उपयोग होता है, पौधों को पर्याप्त हवा और सूर्य का प्रकाश मिलता है तथा फसल की प्रारंभिक वृद्धि भी तेज होती है।

     कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में डीएसआर तकनीक धान उत्पादन का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, पानी की बचत होती है और समय पर बोनी संभव हो जाती है। यही कारण है कि जिले के अनेक किसान अब पारंपरिक रोपा पद्धति छोड़कर सुपर सीडर के माध्यम से डीएसआर तकनीक अपना रहे हैं।

      ग्राम खमरिया के किसानों की यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। यदि इसी प्रकार आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया जाता रहा तो कम लागत में अधिक उत्पादन का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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