महापौर को जल संकट की चिंता कम औरलोकार्पण पट्टी काटने की चिंता ज्यादा - मोखलगायशायद उन्हें लगता है कि फीता काटने से ही पानी अपने आप बहने लगेगा।”पानी की टंकी खाली है, लेकिन शहर के पोस्टर और रिबन भरपूर हैंविकास शायद अब ‘फीता संस्कृति’ में बदल गया हैशहर में जल समस्या के समाधान में उदासीनता पर चिंता



सच की आंखें छिंदवाड़ा - शहर में लगातार गंभीर होते जल संकट के बावजूद नगर प्रशासन द्वारा इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़़ रहा है। कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बाधित है, जबकि नागरिकों को बुनियादी आवश्यकता के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता आकाश मोखलगाय ने आरोप लगाया कि दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि हमारे महापौर आम जनता की मूलभूत जल प्रदाय जैसी समस्या जैसे महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अपना ध्यान लगातार लोकार्पण और औपचारिक कार्यक्रमों में लगाते अधिक दिखाई दे रहे हैं। रविवार 28 जून को ही महापौर द्वारा अक्षत स्मृति साहित्य-वाटिका का लोकार्पण किया गया है, इससे यह प्रतीत होता है कि जमीनी समस्याओं के समाधान की तुलना में दिखावटी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। नगर की आम जनता का यह मानना है कि यदि समय रहते जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और पाइप लाइन, टंकी एवं वितरण प्रणाली को सुधारने पर ध्यान दिया जाता, तो नगर की जनता पेयजल जैसी मूलभूत समस्या के लिये परेशान नहीं होती । मोखलगाय ने कहा कि यदि निगम प्रशासन को यह जानकारी पहले से ही थी कि नगर में पेयजल संकट गहरा सकता है और दिनों दिन जल स्तर कम हो रहा था तो इस समस्या के निराकरण के लिये पहले ही क्यों ध्यान नहीं दिया गया, उन्होनें कहा कि एक ओर तो आम जनता के जलकर की राशि में पहले की अपेक्षा 50 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है, परंतु अब सप्लायी के नाम से कई वार्डो 2 से 4 दिन के अंतराल में पेयजल की सप्लायी हो रही है जबकि बिल पूरा लिया जा रहा है । मोखलगाय ने मांग की है कि दो माह के जलकर की राशि माफ कर आम जनता को राहत दिलवायी जाये और नगर प्रशासन शीघ्र ही इस गंभीर समस्या का संज्ञान ले और प्राथमिकता के आधार पर जल संकट के स्थायी समाधान हेतु ठोस कार्यवाही करे, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके अन्यथा शीघ्र ही इस समस्या का निराकरण नहीं किया गया तो जनहित में उग्र आंदोलन किया जायेगा जिसकी समस्त जबावदारी शासन-प्रशासन की होगी ।
सादर प्रकाशनार्थ

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