सच की आंखें छिन्दवाड़ा:- जिले के पूर्व सांसद माननीय नकुलनाथ जी ने शासकीय अस्पतालों को (पीपीपी) मॉडल पर संचालित किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि मप्र की भाजपा सरकार में लड़खड़ाई हुई स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की बजाए उन्हें निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। इन हालातों में गुणवत्ता वाले उपचार की उम्मीद कैसे की जाएगी? शासकीय अस्पतालों पर समाज का गरीब, आदिवासी व वंचित वर्ग निर्भर रहता है। बीमार होने पर उसकी एकमात्र उम्मीद शासकीय अस्पताल होती है, लेकिन जब यह आश भी सरकारी स्वार्थ के चलते निजीकरण में तब्दील हो जाएगी तो उसकी उम्मीद भी टूट जाएगी।
माननीय नकुलनाथ जी ने आगे कहा कि मप्र के समस्त जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अत्याधुनिक मशीनें, लैब व पर्याप्त चिकित्सक व नर्सिंग स्टॉफ की तैनाती कर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की बजाए प्रदेश सरकार इन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी संस्थाओं के माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों के लिए टेंडर प्रक्रिया के जरिए निजी संस्थाओं का चयन किया जाएगा, जो डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था संभालेंगी। इससे यह साफ हो रहा है कि सरकार अब स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू ढंग से संचालित करने की स्थिति में नहीं है। वह केवल भाषणों, घोषणाओं और प्रचार के माध्यमों में ही नागरिकों को अच्छा इलाज उपलब्ध करा रही।
रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की मंजूरी दी जा चुकी है। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है इसके बाद इसी तर्ज पर प्रदेश के अन्य जिलों के अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को भी निजी संस्थाओं को संचालित करने के लिए सौंपा जाएगा। वर्तमान में सरकारी आंकड़ों के अनुसार मप्र राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग हर चार में से तीन पद खाली है। कुल 5,443 स्वीकृत विशेषज्ञ पदों में से केवल 1,495 पर ही डॉक्टर कार्यरत है, जबकि 3,948 पद खाली पड़े हैं। भाजपा सरकार ने इन पदों को भरे के लिए आज तक कोई ठोस व कारगर कदम नहीं उठाए। कांग्रेस की सरकार के समय निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ही आज भी प्रदेश और देश में सर्वाधिक है। सरकार की नीतियां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की नहीं बल्कि निजी हाथों में सौंपने की है। आज 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, कल इससे अधिक और कुछ दिनों के बाद पूरा स्वास्थ्य महकमा निजी हाथों में होगा।
जनता सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार चाहती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सुविधाओं का विस्तार व डॉक्टरों की भर्ती चाहती है ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही अच्छा इलाज मिल सके। लेकिन सरकार उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर ठेकेदारी सौंपने की तैयारी कर चुकी है।
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कांग्रेस ने मनाया रानी दुर्गावती का 462 वां बलिदान दिवस
-खजरी चौक पहुंचकर वीरांगना की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
-आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार का देंगे मुंहतोड़ जवाब
छिन्दवाड़ा:- फूल नहीं चिंगारी है, वो गोंडवंश की नारी है के साथ गोंडवाना शासक भारतीय इतिहास की प्रसिद्ध नारी, सम्मान की प्रतिमा व ममता की प्रतिमूर्ति थीं। रानी दुर्गावती मडावी गोंडवाना अंचल ही नहीं पूरे देश की शान है, उनका शौर्य, वीरगाथा आज भी अनुकरणीय और नारी शक्ति के गौरव व गरिमा का प्रतीक है।
रानी दुर्गावती वीरांगना ने अपने साम्राज्य की सुरक्षा एवं स्वतंत्रता और अस्मिता के लिए युद्ध भूमि को चुना और कई बार शत्रुओं को पराजित करते हुए 24 जून 1564 को अपनी मातृभूमि के लिए बलिदान दे दिया। राजीव भवन में आयोजित कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने उनके साहस और वीरता को याद कर ममता की प्रतिमूर्ति को शत्-शत् नमन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी समाज ने संकल्प लिया कि छिन्दवाड़ा संसदीय क्षेत्र में जितनी भी जमीन आदिवासी समाज की सामान्य वर्ग को बेची गई है उसके खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। आदिवासियों के हक व अधिकार की लड़ाई कांग्रेस आदिवासी प्रकोष्ठ एकजुट होकर लड़ेगी ताकि आदिवासी समाज का हक व अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित रहें, क्योंकि वर्तमान में आदिवासियों पर सर्वाधिक हमले हो रहे हैं जिसके लिए सरकार जिम्मेदार है।
आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पांढुर्ना जिला प्रभारी श्री गंगाप्रसाद तिवारी ने सर्वप्रथम मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री
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