सच की आंखें न्यूज़ | छिंदवाड़ा
पातालकोट व्यू पॉइंट क्षेत्र की बहुमूल्य आदिवासी भूमि के कथित विवादित क्रय-विक्रय और राजस्व अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका से जुड़े मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव तथा छिंदवाड़ा कलेक्टर को नोटिस जारी किया है।
आयोग द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर "करोड़ों की जमीन बिकी कौड़ियों के दाम, रेवेन्यू अफसर संदिग्ध, पोस्टेड रहते कराया बंटवारा-सीमांकन, रिश्तेदारों के नाम रजिस्ट्री" के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से 30 दिवस के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन एवं की गई कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत प्रदत्त सिविल न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को समन जारी किया जा सकता है।
गौरतलब है कि पातालकोट व्यू पॉइंट क्षेत्र की आदिवासी भूमि के सौदे, बंटवारा, सीमांकन तथा कथित रूप से रिश्तेदारों के नाम रजिस्ट्री किए जाने को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। मामले में कोटवार, पटवारी एवं अन्य राजस्व अमले की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। प्रशासन ने भी प्रारंभिक स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
इस पूरे मामले को उजागर करने एवं संबंधित तथ्यों को सामने लाने में पूर्व न्यायाधीश तथा मीडिया संगठन मध्यप्रदेश के सलाहकार एवं मार्गदर्शक प्रकाश उईके की सतत मेहनत और प्रयास महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार उठाई गई आवाज और उपलब्ध कराए गए तथ्यों के आधार पर अब मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक पहुंच गया है, जिससे निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
क्षेत्र के आदिवासी समाज एवं स्थानीय नागरिकों ने आयोग की पहल का स्वागत करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा आदिवासी हितों की सुरक्षा की मांग की है।हेडिंग विकल्प:
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