तुर्कीखापा में शिक्षक के जुनून ने बदली सरकारी विद्यालय की तस्वीर,पांच सालो से बेहतर शिक्षा,अच्छा वातावरण का महौल

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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सरकारी स्कूलों की हालत किसी से छिपी नहीं होती है. खास तौर पर दूरदराज के गांव में बने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सुविधाओं का टोटा रहता है. काफी विद्यालय तो ऐसे हैं जहां बच्चों की बैठने तक की व्यवस्था ठीक नहीं है.
  मौजूदा दौर में सरकारी स्कूलों में असुविधाओं की वजह से ही बच्चों का दाखिला कम होते नजर आते है. ऐसे में मोहखेड विकासखंड के तुर्कीखापा में एक सरकारी विद्यालय ऐसा है, जहां के शिक्षको ने विद्यालय की सूरत  बदल कर रख दी, जिसके बाद इस विद्यालय की हर कोई तारीफ कर रहा है.अक्सर सरकारी विद्यालय का नाम आते ही जहन में टूटी फूटी बिल्डिंग, छतों से टपकता पानी और बेहाल व्यवस्थाएं नजर आती है, लेकिन तुर्कीखापा गांव का  विद्यालय ऐसा है, जो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां के प्राचार्य अशोक कुमार मौर्य  9 वर्षों में लगातार बदलाव की बयार बहाई है, जिससे शिक्षा का स्तर तो बदला ही बल्कि विद्यालय का परिसर भी हरियाली से अटा पड़ा है. साथ हीं, शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के भविष्य को सवारने के लिए बेहतर वातावरण में शिक्षा दी जा रही है, जिसका बोर्ड परिणाम भी पिछले पांच वर्षो में शत-प्रतिशत रहा है. विद्यालय के शैक्षिक एक्टिविटीज पर तो शिक्षकों का विशेष ध्यान है ही लेकिन विधार्थियो के सर्वांगीण विकास को लेकर भी शिक्षक अग्रणी भूमिका में नजर आते है. विधार्थियों के लिए शाला में बौद्धिक विकास, मानसिक विकास और शारीरिक विकास को लेकर शाला में निरंतर प्रतिगोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिससे विधार्थियों में शैक्षिक गुणवत्ता के साथ-साथ इनका भी विकास हो सके. शारीरिक विकास को लेकर खेल ग्राउंड में विधार्थियों के बीच विभिन्न खेल प्रतियोगिता का आयोजन साप्ताहिक किया जाता है, जिससे विधार्थी शैक्षणिक योग्यता के साथ मेंटली, फिजिकली भी तैयार हो सकें.विद्यालय का परिवार विद्यालय में शैक्षिक स्तर को निरंतर गुणवत्तापूर्ण करने में जुटा रहता है.
  विद्यालय प्राचार्य ने अशोक कुमार मौर्य ने 9 वर्ष पहले विद्यालय में जॉइन कर विद्यालय के हालात देखें, जहां छतों से पानी टपकता था, खेल ग्राउंड में कीचड़ झाड़ियां और पत्थर पड़े थे और शैक्षणिक वातावरण भी बच्चों के अनुकूल नहीं था. ऐसे में प्राचार्य ने इस सरकारी विधालय की सूरत  बदलने की ठान ली. अपने विद्यालय परिवार का सहयोग और भामाशाहों से सहयोग लेकर विद्यालय भवन की मरम्मत करवाई, जिससे शाला के कमरों की टपकती छतों से विधार्थियों को निजात मिली. विद्यालय ग्राउंड में  पेड़-पौधे लगाए,पेड़-पौधे मैदान की शोभा बढ़ा रहे हैं. वहीं, शिक्षक गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया. शिक्षकों के जुनून के आगे सब समस्याएं निढाल हो जाती हैं. विद्यालय के सभी शिक्षक लगातार बेहतर शिक्षा और अच्छा वातावरण के लिए प्रयास करते रहते हैं और भामाशाह से हर संभव मदद लेते हैं. साथ हीं, सरकार से भी समय-समय पर आवश्यकता होगी मांग करते हैं. अगर कोई भी व्यक्ति ठान लें और समस्याओं को जुनून के रूप में स्वीकार कर समस्याओं को लड़ना शिख ले तो किसी व्यक्ति के जुनून के आगे समस्याएं भी नतमस्तक हो जाती है. विद्यालय परिवार ने समस्याओं से लड़ समस्याओं से निजात पाई. अगर हर सरकारी विद्यालय का परिवार पूरे जुनून से कार्य करें, तो वो दिन दूर नहीं जब सरकारी विद्यालय शैक्षिक गुणवत्ता में निजी विद्यालय से भी बेहतर होंगे और अभिभावकों का रुझान सरकारी विद्यालय की ओर बढ़ेगा. इस सिख से सबको को सीखने की आवश्यकता है, ताकि सरकारी व्यवस्थाओं का सभी को सही तरीके से लाभ मिल सकें. ऐसे उदहारण समाज में अच्छा संदेश देने का एक तरीका है.

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