खनिज विभाग की बड़ी लापरवाही? कार्रवाई सिर्फ दिखावा, कट्टा नदी से जारी अवैध रेत खनन के आरोप
नदी का सीना हो रहा खाली। जुन्नारदेव में अवैध रेत खनन की यह कहानी कई असहज सवाल खड़े कर रही है।
छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव क्षेत्र स्थित कट्टा नदी में इन दिनों अवैध रेत खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और नदी किनारे बसे लोगों का दावा है कि बीते कुछ दिनों से आधी रात के बाद नदी घाटों पर ट्रैक्टर और डंपरों की आवाजाही बढ़ जाती है और रेत निकासी का काम खुले तौर पर किया जा रहा है। यह घटनाक्रम जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह से लगातार देखे जाने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, रात के अंधेरे का फायदा उठाकर रेत माफिया मशीनों और ट्रैक्टरों की मदद से नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाल रहे हैं। कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महादेव मेले से पहले निर्माण कार्यों की मांग बढ़ने के कारण अवैध रेत की सप्लाई तेज कर दी गई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि रात में खनन जारी है, तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्षेत्र के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि छिटपुट दबिश तो दी जाती है, लेकिन नियमित गश्त और स्थायी रोकथाम की व्यवस्था कमजोर दिखाई देती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, अनियंत्रित रेत खनन से नदी की धारा बदलने, जलस्तर गिरने और किनारों पर कटाव बढ़ने का खतरा रहता है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। यह केवल राजस्व का मामला नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।
इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। यदि प्रशासन की ओर से कोई बयान आता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल स्थानीय लोग कड़ी निगरानी, संयुक्त कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
मनेश पत्रकार आपसे पूछता है… क्या आपके क्षेत्र में भी रात के समय इस तरह की गतिविधियां देखी जा रही हैं? क्या प्रशासन को और सख्त कदम उठाने चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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