सौसर। माँ भवानी माता की असीम कृपा से बेरडी रोड स्थित माँ भवानी माता मंदिर में आयोजित पावन श्रीराम कथा का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कथा के सात दिवसीय प्रवाह में धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन के अमूल्य सूत्रों का दिव्य प्रकाश श्रद्धालुओं के हृदय में जागृत होता रहा।
प्रयागराज से पधारे पूज्य पंडित श्री कृष्णानंद शुक्ला महाराज ने अपने श्रीमुख से प्रभु श्रीराम के आदर्श, मर्यादित और त्यागमय जीवन का मार्मिक एवं संगीतमय वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम और माता सीता सत्य, कर्तव्य और धर्म के जीवंत प्रतीक हैं। राजा दशरथ के आज्ञाकारी पुत्र के रूप में श्रीराम का वनगमन त्याग और आदर्श का सर्वोच्च उदाहरण है।
माता सीता के पावन, पतिव्रता और धैर्यपूर्ण चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि वे शक्ति, सहनशीलता और नारी गौरव की दिव्य प्रतिमा हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी उनका अटल विश्वास और पवित्रता समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
भक्त शिरोमणि हनुमान के अनन्य समर्पण का प्रसंग सुनाते हुए कहा गया कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें अहंकार का लेश मात्र भी न हो। हनुमान ने अपने बल, बुद्धि और पराक्रम को सदैव प्रभु श्रीराम की सेवा में अर्पित किया। उनका जीवन संदेश देता है कि जब श्रद्धा और समर्पण सच्चे हों, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
कथा के दौरान भगवान शिव एवं माता पार्वती की दिव्य कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। शिव का सरल, करुणामय और त्यागपूर्ण स्वरूप तथा पार्वती की अटूट तपस्या, निष्ठा और संकल्प ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। शिव-पार्वती का दांपत्य जीवन समर्पण, संतुलन और पारिवारिक आदर्श का प्रतीक बताया गया।
कथा समापन के उपरांत विधिवत हवन-पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ क्षेत्रवासियों के सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की गई। माँ भवानी माता के चरणों में नमन कर समस्त जनकल्याण हेतु प्रार्थना अर्पित की गई। इस अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित
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