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₹3.47 करोड़ के आदिवासी छात्रावास निर्माण पर उठे सवाल, गुणवत्ता की जांच की मांग


बिना पिलर खोदे निर्माण और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप, नवागत कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग

पन्ना। जिले के पुराना पन्ना क्षेत्र में आरटीओ कार्यालय के पीछे आदिम जाति कल्याण विभाग के विद्यार्थियों के लिए करीब 3 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से छात्रावास भवन का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन और सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल

जानकारी के अनुसार, छात्रावास भवन के निर्माण की जिम्मेदारी सोनी कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपी गई है, जबकि निर्माण कार्य की निगरानी पुलिस हाउसिंग बोर्ड की एजेंसी द्वारा की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर नींव और पिलर के निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। साथ ही, निर्माण में उपयोग की जा रही रेत, गिट्टी और सीमेंट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और तकनीकी जांच होना अभी आवश्यक है।

पत्थरीली जमीन का दिया जा रहा हवाला

स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठाए जाने पर संबंधित एजेंसी के अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर बताया गया कि निर्माण स्थल पर पत्थर अधिक होने के कारण बिना पिलर खोदे वैकल्पिक तकनीकी पद्धति से काम कराया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अपनाई जा रही निर्माण पद्धति स्वीकृत तकनीकी डिजाइन और भवन निर्माण के निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।

छात्रावास में भविष्य में आदिवासी विद्यार्थी निवास करेंगे। ऐसे में भवन की मजबूती, सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

नवागत कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों ने पन्ना के नवागत कलेक्टर हर्ष सिंह से छात्रावास भवन निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री के नमूनों की जांच कराई जाए तथा नींव, पिलर और अन्य संरचनात्मक हिस्सों का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। छात्रावास जैसे महत्वपूर्ण भवन की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराना आवश्यक है, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते दूर किया जा सके।

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