जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग का कदम, अस्पताल प्रबंधन से मांगा गया था जवाब
पन्ना।। पन्ना जिला मुख्यालय स्थित मैस्कॉट हॉस्पिटल का पंजीयन स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई 18 वर्ष से कम उम्र की आदिवासी किशोरी के गर्भसमापन से जुड़े मामले में जांच के बाद की गई है। विभागीय जांच में सामने आया कि अस्पताल गर्भसमापन की प्रक्रिया के लिए अधिकृत नहीं था। इसके बावजूद यहां किशोरी का गर्भसमापन किए जाने की बात सामने आई।
मामले में यह भी सामने आया कि नाबालिग से जुड़े प्रकरण की जानकारी पुलिस और बाल कल्याण समिति को नहीं दी गई थी। अस्पताल प्रबंधन से इस संबंध में जवाब मांगा गया था। बताया गया है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय की ओर से अस्पताल का पंजीयन निरस्त करने का आदेश जारी किया गया।
किलकिला नदी के किनारे भ्रूण मिलने से शुरू हुई थी जांच
इस मामले की शुरुआत कुछ माह पहले किलकिला नदी के किनारे दफनाए गए भ्रूण की सूचना मिलने के बाद हुई थी। एक सफाईकर्मी की सूचना पर पुलिस ने संबंधित स्थान पर खुदाई कराकर भ्रूण बरामद किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अस्पताल से संबंधित दस्तावेज, रजिस्टर तथा सीसीटीवी फुटेज जब्त किए। जांच आगे बढ़ने पर अस्पताल में नाबालिग किशोरी के गर्भसमापन से जुड़े तथ्य सामने आए।
प्रकरण की जांच लंबे समय तक चली। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की। अस्पताल के पंजीयन को निरस्त किए जाने से इस मामले ने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।
कार्रवाई को लेकर राजनीतिक षड्यंत्र का दावा
मैस्कॉट हॉस्पिटल का संचालन डॉक्टर केपी राजपूत की पत्नी जागृति सिंह द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक षड्यंत्र किए जाने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों को लेकर आगे की स्थिति पर नजर रहेगी।

एक टिप्पणी भेजें