ई-टोकन व्यवस्था और सर्वर की समस्या से परेशान किसानों का अमानगंज में प्रदर्शन, चक्काजाम का प्रयास; तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
अमानगंज। खेतों में फसलों की जरूरत के समय खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को ई-टोकन व्यवस्था और सर्वर की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि खाद उपलब्ध होने के बावजूद टोकन बुकिंग में आ रही परेशानियों के कारण उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। इसी समस्या को लेकर गुरुवार को समाजसेवी तिलक राज पटेल के नेतृत्व में किसानों ने अमानगंज में प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने अमानगंज-किशनगढ़ मुख्य मार्ग पर चक्काजाम करने का प्रयास किया।
सूचना मिलने पर अमानगंज पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को समझाइश दी। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कलेक्टर पन्ना के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग की।
टोकन व्यवस्था सरल करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान समाजसेवी तिलक राज पटेल ने सरकार और प्रशासन की खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना है, तो ई-टोकन व्यवस्था को सरल बनाया जाना चाहिए। टोकन बुकिंग की सुविधा कम से कम 12 घंटे तक उपलब्ध कराने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि किसान खेतों में काम करने के बजाय मोबाइल पर टोकन बुक करने और सर्वर चालू होने का इंतजार करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को खाद के लिए बार-बार परेशान नहीं होना पड़े, इसके लिए प्रशासन को व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना चाहिए। किसानों का कहना है कि खेती-किसानी के व्यस्त समय में खाद के लिए घंटों प्रयास करने से उनका समय और मेहनत दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
22 दिनों से परेशानी, दो दिन का अल्टीमेटम
किसानों का आरोप है कि पिछले 22 दिनों से ई-टोकन बुकिंग में सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने टोकन बुकिंग की समय-सीमा एक घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने, जरूरत पड़ने पर बिना टोकन खाद वितरण की व्यवस्था करने, खाद के स्टॉक की ऑनलाइन जानकारी दर्ज नहीं करने वाले संचालकों पर कार्रवाई करने तथा खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की है।
किसानों ने प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में खाद की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे धरने पर बैठकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर कितनी शीघ्र कार्रवाई करता है। फिलहाल किसानों की निगाहें खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और समस्या के समाधान पर टिकी हैं।

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