पंचायत के असहयोग से दूसरी बार बिना जांच लौटी जिला टीम, भ्रष्टाचार जांच पर उठे सवाल

सात दिनों में दूसरी बार जिले से पहुँची जांच टीम बिना जांच के लौटी वापस
पंचायत द्वारा जांच में सहयोग न करने की वजह से अधिकारी बैरंग वापस

पंचायत में हुए भ्रष्टाचार और निर्माण कार्य की होनी थी जाँच

गुढ़ी / जुन्नारदेव ----- जनपद पंचायत जुन्नारदेव अंतर्गत ग्राम पंचायत पालाचौरई क्षेत्र में जिला से जांच दल पहुँचने की जानकारी गुरुवार को ही मिल गई थी, शुक्रवार सुबह से ही पंचायत में हडकंप मचा रहा और पंच एवं ग्रामीण जांच दल का इंतजार करते रहे। जिले से पीडब्लूडी के अधिकारी एसडीओ एचएल ठाकुर सहित जुन्नारदेव एसडीओ एवं अन्य अधिकारी जांच करने 2.30 बजे पंचायत पहुंचे जनपद पंचायत जुन्नारदेव के अधिकारी सहित पंचायत द्वारा मनेरेगा योजना के अंतर्गत आठ माह पूर्व करीब 15 लाख से निर्माण की गई पुलिया की जांच करने पहुँचें थे, लेकिन पंचायत द्वारा जांच स्थल पर दस्तावेज एवं जांच में किसी भी प्रकार से सहयोग न किये जाने की वजह से जांच टीम पंचनामा बनाकर बैरंग वापस हो गई। पंचायत के जिम्मेदार के सामने अधिकारी असहाय नजर आये और सहयोग न करने पर नाराज़गी जाहिर की जांच के नाम पर खानापूर्ता पर ग्रामीण एवं पंच में भारी आक्रोश है और जांच का विरोध किया गया। इसके पूर्व भी 21 फरवरी को जिला स्तरीय जांच टीम शाम 6.30 बजे पहुँचें थे जिससे होने वाली जाँच नही हो पायी थी, जाँच के लिये शिकायतकर्ता पंचायत में शाम 06 बजे तक इंतजार करते रहे, किन्तु जांच टीम सूरज डूबने के बाद समय पर न आने के चलते होने वाली जांच नहीं हो पायी थी। वहीं अब एक बार फिर जिला स्तर से आई टीम को पंचायत द्वारा सहयोग न करने पर एक बार फिर टीम बिना जांच के बैरंग ही वापस लौट गई है।
फर्जीबाड़ा उजागर, कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ती ---- पंचायत में घटिया निर्माण एवं फर्जी तरीके से राशि का आहरण और खरीदी में वित्तीय अनियमितता के मामले में पंचायत की दर्जनो शिकायते हो चुकी है, किन्तु जनपद पंचायत जुन्नारदेव ने कार्यवाही तो दूर जाँच भी पूरी नहीं की हुई लेकिन अधूरी जांच के बाद भी पालाचौरई में लगभग आठ लाख का फर्जीबाड़ा उजागर होने के बाद सरपंच, सहित तीन लोग दोषी पाये गए लेकिन आज तक कार्यवाही और एफआईआर का इंतजार है। 

अनशन कर्ता की मांग पर जिला से पहुँचा जांच दल ------ जब पंचायत के पंच, पेशा एक्ट समिति एवं ग्रामीण के सहयोग से क्रमिक अनशन पर 12 दिन बैठने, के पश्चात क्रमिक अनशन स्थगित हुआ। नायब तहसीलदार अनशन स्थल पर और अनशन पर बैठे लोगो से चर्चा की, तब जाकर पंचायत में किये गये निर्माण कार्य, वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार की एक माह में जाँच अन्य एजेंसी से कराने की बात पर सहमति बनने के बाद अनशन स्थगित किया गया। अब एक बार फिर जांच समिति के बैरंग लौटने पर पूरी जांच पर ही सवाल उठ रहे हैं कि जिला स्तर से भी भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही क्यों टाली जा रही है, आखिर पंचायत दस्तावेजों को देने में क्यों कोताही बरत रही है, फिलहाल दस्तावेजों के आधार पर ही पूरी जांच संभव है और दूध का दूध और पानी का पानी होने की पूरी संभावना भी है। पंच, पेसा एक्ट समिति सदस्य एवं ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर सहित जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए पंचनामा पर ग्रामीण एवं पंच सहित उपस्थित जनों ने हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया था इसके बाद अधिकारियों द्वारा बिना ग्रामीणों के हस्ताक्षर के ही पंचनामा तैयार किया गया था।

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