सच की आंखें नवेगांव। रविवार की काली रात पत्रकारिता जगत के लिए एक ऐसा घाव दे गई.
जिसकी भरपाई नामुमकिन है। मीडिया संगठन इकाई नवेगांव के अध्यक्ष जवल धुर्वे अब हमारे बीच नहीं रहे। एक सड़क हादसे ने न केवल एक कलम के सिपाही को हमसे छीना, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया है।
अथक प्रयास भी हार गए मौत से
हादसे की खबर मिलते ही संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गयाप्रसाद सोनी और जिलाध्यक्ष मनेश साहू सहित तमाम साथियों ने जवल और उनके मासूम बच्चे की जान बचाने के लिए जमीन-आसमान एक कर दिया था। अस्पताल की चौखट से लेकर दुआओं के दौर तक, हर संभव कोशिश की गई, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। जवल धुर्वे अनंत की यात्रा पर निकल गए, जबकि उनका मासूम बच्चा इस
वक्त गंभीर चोटों से जूझ रहा है।
नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई
सोमवार को जवल धुर्वे का पार्थिव शरीर जब पंचतत्व में विलीन हुआ, तो पांढुर्णा, बैतूल और छिंदवाड़ा से संगठन के पत्रकार की उपस्थिति प्रशासन और समाज को यह बताने के लिए काफी था कि जवल ने अपने पीछे कितनी बड़ी विरासत छोड़ी है। मीडिया संगठन के अधिकारीगण और साथियों ने भारी मन से अपने साथी को संबल दिया और अंतिम संस्कार में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
संगठन खड़ा है
ढाल बनकर
... मीडिया संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गयाप्रसाद सोनी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस भयावह दुख की घड़ी में संगठन का हर सदस्य शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा रहे।
तीखा सवाल "कलम की आवाज बुलंद
पसरती यह मौत और प्रशासनिक सुस्ती करने वाले हाथ आज खामोश हो गए हैं। सवाल यह है कि क्या सड़कों पर ऐसे ही होनहारों को हमसे छीनती रहेगी? आज एक पत्रकार नहीं, बल्कि एक रक्षक ने दम तोड़ा है।"
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