तामिया कॉलेज बना जागरूकता का मैदान — लाइसेंस से लेकर रोजगार और पर्यावरण तक, एक ही दिन में कई बड़े संदेश

तामिया कॉलेज बना जागरूकता का मैदान — लाइसेंस से लेकर रोजगार और पर्यावरण तक, एक ही दिन में कई बड़े संदेश
छिंदवाड़ा जिले के तामिया स्थित शासकीय महाविद्यालय में 30 जनवरी 2026 को कुछ अलग नज़ारा देखने को मिला। यहां सिर्फ पढ़ाई की बातें नहीं हुईं — बल्कि सड़क सुरक्षा, रोजगार अवसर, विधिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर ज़मीनी पहल करते हुए एक बहुउद्देश्यीय शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सीधी भागीदारी और मौके पर मिलने वाली सुविधाओं ने इसे खास बना दिया।
महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस शिविर की शुरुआत सरस्वती पूजन और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कार्यक्रम में कॉलेज प्रशासन, पुलिस विभाग, आरटीओ टीम, रोजगार और पर्यटन से जुड़े प्रतिनिधि तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। आयोजन का मुख्य फोकस विद्यार्थियों को व्यवहारिक सुविधा और जागरूकता एक साथ उपलब्ध कराना था।
सबसे अधिक चर्चा में रहा ऑन-द-स्पॉट लर्निंग लाइसेंस शिविर। आरटीओ टीम की मौजूदगी में करीब 150 छात्राओं ने एक ही स्थान पर लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी की। इससे उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली। विद्यार्थियों ने इसे समय और संसाधन बचाने वाली पहल बताया।
यातायात सुरक्षा सत्र में पुलिस थाना प्रभारी आशीष जैतवार ने सड़क अनुशासन पर स्पष्ट और व्यावहारिक जानकारी दी। हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, गति सीमा के पालन और दुर्घटना से बचाव के उपायों पर विस्तार से समझाइश दी गई। संदेश साफ था — नियम जानकारी के लिए नहीं, जीवन बचाने के लिए हैं।
कार्यक्रम में रोजगार पंजीयन और रोजगार कार्यालय की उपयोगिता पर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किस तरह समय पर पंजीयन और सही मार्गदर्शन से अवसरों तक पहुंच आसान हो सकती है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े वक्ता ने भी रोजगारपरक संभावनाओं और यातायात की भूमिका पर तथ्य रखे।
सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को जोड़ते हुए परिसर में पौधरोपण किया गया। इस गतिविधि का नेतृत्व डॉ. निर्भय सिंह डोडवे ने किया। साथ ही मौन दिवस के अवसर पर महापुरुषों को नमन कर उनके योगदान को याद किया गया, जिसका संचालन डॉ. विपिन माहोरे के मार्गदर्शन में हुआ।
कार्यक्रम संचालन माधविका उईके और निरंजन सिंह राजपूत ने किया। आयोजन व्यवस्थाओं में स्वामी विवेकानंद प्रकोष्ठ और महाविद्यालय स्टाफ की सक्रिय भूमिका रही। अंत में महाविद्यालय परिवार ने सभी विभागों और सहयोगियों के प्रति आभार जताया।
यह पूरा आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कैंपस स्तर पर समन्वित जागरूकता मॉडल के रूप में सामने आया — जहां सुविधा, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी एक मंच पर दिखी।

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