क्लासरूम में किताब नहीं, शराब की गंध!” — नशे की हालत में स्कूल पहुंचे शिक्षक, बोले: ‘हां, मैंने पी रखी है’

क्लासरूम में किताब नहीं, शराब की गंध!” — नशे की हालत में स्कूल पहुंचे शिक्षक, बोले: ‘हां, मैंने पी रखी है’
क्लासरूम में किताब नहीं, शराब की गंध!” — नशे की हालत में स्कूल पहुंचे शिक्षक, बोले: ‘हां, मैंने पी रखी है’

📅 मामला: मंगलवार, फरवरी 2026
सुबह का वक्त… नन्हे बच्चे पढ़ाई के लिए स्कूल पहुंचे, लेकिन कक्षा में दाख़िल होते ही माहौल बदला हुआ था। किताबों की जगह हवा में शराब की तेज़ गंध थी। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम बंजारीगुड़ी की प्राथमिक शाला की सच्चाई बताई जा रही है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
ग्राम बंजारीगुड़ी स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक कुंवरलाल भारती पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे नियमित रूप से शराब के नशे में स्कूल आते हैं और उसी हालत में बच्चों को पढ़ाते हैं। मंगलवार को जब सब्र का बांध टूटा, तो बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंच गए और शिक्षक से सीधे सवाल किए।
“हां, मैंने शराब पी रखी है…”
अभिभावकों का आरोप है कि जब उन्होंने शिक्षक को नशे की हालत में स्कूल आने से रोका, तो शिक्षक ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि खुलेआम यह स्वीकार कर लिया —
“हां, मैंने शराब पी रखी है।”
यही नहीं, कथित तौर पर शिक्षक ने यह भी कहा —
“यहां कई आए और चले गए, मेरा कुछ नहीं हुआ।”
इस बयान ने ग्रामीणों को और आक्रोशित कर दिया। सवाल सीधा था — जब नशा नहीं है, तो स्कूल में शराब की हालत क्यों?
पंचनामा बनाकर भेजा गया शिक्षा विभाग को
ग्रामीणों ने मामले को हल्के में नहीं लिया। शिक्षक का मौके पर पंचनामा तैयार किया गया, जिसे विधिवत शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भेजा गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ एक है — सच्चाई सामने आए और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे।
शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
शिकायत सामने आते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया। विभागीय सूत्रों के अनुसार,
शिकायतों के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल किसी भी स्तर पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है, लेकिन विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है। यह सवाल उठाता है कि —
क्या ग्रामीण स्कूलों में निगरानी तंत्र कमजोर है?
बच्चों की सुरक्षा और मानसिक विकास की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या शिकायत के बाद ही व्यवस्था जागेगी?
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक बच्चों को “गलत शब्द नहीं सिखाने” की दलील दे रहे हैं, लेकिन नशे की हालत में स्कूल आना ही अपने आप में बच्चों के लिए गलत उदाहरण है।
बाइट (रिकॉर्डेड बयान – जांचाधीन)
रमेश कुमार ऊईके, प्रधान पाठक
सुमरन सरेआम, पालक शिक्षक संघ अध्यक्ष
कुंवरलाल भारती, शिक्षक (आरोपों के संबंध में)
(बाइट्स विभागीय जांच के अंतर्गत हैं, अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।)
❓ मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
अगर शिक्षक ही नशे में बच्चों के सामने खड़े हों, तो क्या हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है?
👉 आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर लिखें।

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