रात के सन्नाटे में चल रही हलचल… क्या कन्हान कोयलांचल की पहाड़ियां फिर बन रही हैं काले कारोबार का अड्डा?

🚨 रात के सन्नाटे में चल रही हलचल… क्या कन्हान कोयलांचल की पहाड़ियां फिर बन रही हैं काले कारोबार का अड्डा?
रात के सन्नाटे में चल रही हलचल… क्या कन्हान कोयलांचल की पहाड़ियां फिर बन रही हैं काले कारोबार का अड्डा?

दमुआ (छिंदवाड़ा) | दिनांक — फरवरी 2026
कन्हान कोयलांचल क्षेत्र एक बार फिर कथित अवैध कोयला उत्खनन की चर्चाओं से गर्म है। दमुआ क्षेत्र के रामपुर इलाके और तानसी के समीप दूधपानी पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर कोयला निकासी और परिवहन की गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्रीय सूत्रों और ग्रामीणों के दावों ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से इलाके में भारी वाहनों और मशीनों की आवाजाही बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि देर रात और सुबह के समय पहाड़ी क्षेत्रों में गतिविधियां देखी जा रही हैं, जिससे अवैध उत्खनन की आशंका जताई जा रही है। कुछ लोगों का दावा है कि लगभग 2000 टन कोयले के संभावित भंडार पर संगठित गिरोह की नजर हो सकती है, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

क्षेत्र में चर्चा है कि कथित रूप से बाहरी तत्वों के सहयोग से एक नेटवर्क तैयार किया गया है, जो आधुनिक मशीनरी के माध्यम से कार्य कर रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल खनन नियमों बल्कि वन संरक्षण और पर्यावरणीय मानकों का भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित उत्खनन से पहाड़ियों की संरचना कमजोर होती है और भू-स्खलन तथा जल स्रोतों पर भी असर पड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निगरानी को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी गतिविधि चल रही है तो संबंधित विभागों — वन, राजस्व और पुलिस — को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली या अब तक कार्रवाई क्यों सामने नहीं आई। हालांकि अधिकारियों से संपर्क करने पर कुछ जिम्मेदारों ने अनौपचारिक रूप से बताया कि मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी।
जानकारों के मुताबिक कन्हान कोयलांचल पहले भी अवैध खनन को लेकर संवेदनशील क्षेत्र रहा है, जहां समय-समय पर कार्रवाई भी हुई है। ऐसे में ताजा आरोपों ने फिर से निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। यदि जांच में तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पर्यावरणीय और कानून-व्यवस्था से जुड़ी बड़ी चुनौती बन सकता है।

फिलहाल प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। सच क्या है — यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन क्षेत्र में उठ रहे सवाल यह जरूर संकेत दे रहे हैं कि पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संबंधित विभाग मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट करेंगे या यह मामला भी चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा।

👉 मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
क्या कन्हान कोयलांचल में अवैध उत्खनन पर सख्त संयुक्त जांच टीम बननी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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