लाल ट्रैक्टरों’ का खौफ या अफसरों का संरक्षण?नदी का सीना चीरने वाले रसूखदार पर मेहरबान क्यों है प्रशासन!

लाल ट्रैक्टरों’ का खौफ या अफसरों का संरक्षण?
नदी का सीना चीरने वाले रसूखदार पर मेहरबान क्यों है प्रशासन!

सिंगोड़ी/खकरा चौरई। खकरा चौरई क्षेत्र की नदियों से सरेआम रेत का अवैध उत्खनन जारी है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। क्षेत्र में चर्चा है कि आखिर वह कौन सा सफेदपोश या रसूखदार व्यक्ति है, जिसके तीन लाल रंग के ट्रैक्टर रात के अंधेरे में बेखौफ होकर नदी से रेत निकाल रहे हैं और खनिज विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक आंखें मूंदे बैठा है।

ग्रामीणों में इस मामले को लेकर आक्रोश के साथ दहशत का माहौल भी है। नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि इन ट्रैक्टरों को रोकने या टोकने की हिम्मत किसी में नहीं है। रात भर ट्रैक्टरों की आवाज और रेत परिवहन का सिलसिला इस बात का संकेत देता है कि यह अवैध कारोबार बिना किसी बड़े संरक्षण के संभव नहीं है।

नदी का दम घोंट रहा अवैध उत्खनन

विशेषज्ञों के अनुसार नदियों से इस तरह अंधाधुंध रेत निकालने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे क्षेत्र में जलस्तर गिर सकता है, नदी का पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित होता है और बरसात के समय बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है। नदी की रेत पानी को रोककर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन लगातार हो रहे उत्खनन से भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका है।

जनता के सुलगते सवाल

अब क्षेत्र की जनता प्रशासन से सवाल कर रही है कि क्या प्रशासन को इस अवैध कारोबार की जानकारी नहीं है या सब कुछ जानकर अनजान बना हुआ है? रात में चल रहे इन लाल ट्रैक्टरों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या खनिज विभाग और राजस्व अमला केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा?

अब देखना यह है कि प्रशासन कब कार्रवाई करता है और अवैध रेत उत्खनन में लगे इन ट्रैक्टरों पर कब जब्ती की कार्रवाई होती है।

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