सिंगोड़ी में डिजिटल डकैती का जाल: बंद दुकान की आड़ में सोनू चला रहा 'आईडी रेंटिंग' का काला खेल

सिंगोड़ी में डिजिटल डकैती का जाल: बंद दुकान की आड़ में सोनू चला रहा 'आईडी रेंटिंग' का काला खेल

मात्र 10 मिनट के लिए बैंक आईडी और QR कोड मांगकर युवाओं को फंसा रहा शातिर आरोपी

अमरवाड़ा/सिंगोड़ी। जिले के सिंगोड़ी क्षेत्र में इन दिनों डिजिटल अपराध का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है। 'सोनू' नाम का एक शातिर व्यक्ति, जिसने हाल ही में अपनी ऑनलाइन दुकान बंद कर दी है, अब क्षेत्र के भोले-भाले युवाओं को अपना मोहरा बना रहा है। वह 'अकाउंट और आईडी रेंटिंग' के जरिए युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

जल्द अमीर बनने का झांसा:
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी सोनू युवाओं को यह कहकर फुसलाता है कि उसे व्यापारिक लेनदेन के लिए मात्र 10 से 20 मिनट के लिए उनके बैंक अकाउंट या मर्चेंट अकाउंट (QR कोड) की जरूरत है। इस छोटे से काम के बदले वह युवाओं को 10000 से लेकर 20,000 रुपये तक के कमीशन का लालच देता है। क्षेत्र के कई बेरोजगार युवा इस 'आसान पैसे' के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई और भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।

कैसे फंसते हैं युवा?
आरोपी पुराने नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है। वह युवाओं को भरोसा दिलाता है कि इसमें कोई जोखिम नहीं है, जबकि हकीकत इसके उलट है। दरअसल, इन खातों का उपयोग साइबर ठगी, अवैध सट्टेबाजी या मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे को घुमाने के लिए किया जाता है। जब पुलिस कार्रवाई करती है, तो असली अपराधी पर्दे के पीछे रह जाता है और बैंक खाता धारक (युवा) मुख्य आरोपी बन जाता है।

कानूनी परिणाम और जेल:
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अपना बैंक अकाउंट या आईडी किसी को किराए पर देना एक गंभीर अपराध है। आईटी एक्ट के तहत इसमें 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। एक बार नाम पुलिस रिकॉर्ड में आने पर युवाओं का करियर पूरी तरह तबाह हो सकता है।

सिंगोड़ी क्षेत्र के युवाओं से अपील:
स्थानीय प्रशासन और जागरूक नागरिकों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह कितना भी परिचित क्यों न हो, अपना ओटीपी, बैंक आईडी या क्यूआर कोड इस्तेमाल करने के लिए न दें। यह 'डिजिटल डकैती' आपके जीवन भर की कमाई और सम्मान को छीन सकती है।

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