पति के निधन के बाद नहीं मानी हार, मां ने संघर्ष से बच्चों का संवारा भविष्य

मां के संघर्ष की तपिश में तपकर बच्चे बन रहे सोना
पति के निधन के बाद नहीं मानी हार, मां ने संघर्ष से बच्चों का संवारा भविष्य
जुन्नारदेव। कहा जाता है कि मां केवल जन्म ही नहीं देती, बल्कि अपने संघर्ष, संस्कार और त्याग से बच्चों का भविष्य भी गढ़ती है। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है जुन्नारदेव विकासखंड की ग्राम पंचायत नौलखापा निवासी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रंजन माला आम्रवंशी ने, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार की मजबूत नींव दी।

जानकारी के अनुसार रंजन माला आम्रवंशी के पति स्वर्गीय रामाधार आम्रवंशी का निधन 30 मई 2012 को हो गया था। उस समय उनका सबसे छोटा बेटा महज डेढ़ वर्ष का था। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी रंजन माला के कंधों पर आ गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और संघर्षों के बीच बच्चों की परवरिश व शिक्षा को प्राथमिकता दी।

उनकी बड़ी बेटी दीपाक्षी आम्रवंशी ने एमए की डिग्री प्राप्त कर ली है और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। वहीं छोटी बेटी वर्णिका आम्रवंशी बीएससी स्नातक उत्तीर्ण कर चुकी हैं। बेटा तरंग आम्रवंशी वर्तमान में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है।

सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद रंजन माला ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी दिए। गांव और क्षेत्र में उनके संघर्ष और समर्पण की सराहना की जा रही है। यह परिवार आज उन माताओं के लिए प्रेरणा बन गया है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष कर रही हैं।

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