महंगाई से आम आदमी का निकला दिवाला और बीजेपी नेताओं का मानसिक दिवालियापन:- कांग्रेसशेषराव यादव भाजपा का चश्मा हटाकर महंगाई को जनता के नजरिए से देखें-महंगाई ने तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड, क्योंकि देश में है भाजपा की सरकार-भाजपा की सरकार मतलब महंगाई और भ्रष्टाचार की पूरी गारंटी-भाजपा जिलाध्यक्ष को सिर्फ राजनीति सूझ रही, जनता पर पड़ी महंगाई नहीं दिख रही


सच की आंखें

छिन्दवाड़ा:- भाजपा का नारा है महंगाई बढ़े तो विकास और जनता की जेब खाली हो जाए तो राष्ट्रहित का उपदेश। शेषराव यादव सबसे पहले अपनी आंखों से महंगाई की गारंटी देने वाली भाजपा का चश्मा उतार दें। अपना इतिहास और भूगोल दोनों मजबूत करे। अपनी पार्टी के गिरेबां में झांके और फिर कांग्रेस पर बयान देंक्योंकि उन्हें सिर्फ राजनीति सूझती है। बढ़ती हुई महंगाई कभी दिखाई नहीं देतीक्योंकि यह आपदा उनकी सरकार ने जनता पर डाली है। वे युद्धसंकट और वैश्विक आपदा का जो उपदेश दे रहे उस पर मेरा उनसे सीधा प्रश्न है कि अभी तक वे और उनकी पार्टी क्या घास काट रही थीया देश चला रही थी?  महंगाई से आम आदमी का दिवाला निकल चुका है और भाजपा नेताओं की मानष्कि दिवालियापन भी सामने  चुका। उक्त उदगार कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता गुंजन शुक्ला ने भाजपा जिलाध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने जारी बयान में कहा कि भाजपा जिलाध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पेट्रोलियम पदार्थ ही नहीं सम्पूर्ण खाद्य सामग्री समाज के हर वर्ग की पहुंच में थीं। अगर उन्हें यह याद नहीं तो पढ़ लें कि वर्ष 2004 में पेट्रोल लगभग 35 रुपए प्रति लीटर और डीजल लगभग 24 रुपए प्रति लीटर था। वर्ष 2009 में पेट्रोल 45 रुपए प्रति लीटर एवं डीजल 35 रुपए प्रति लीटर था। वर्ष 2014 में पेट्रोल 71 से 72 रुपए प्रति लीटर और डीजल 57 रुपए प्रति लीटर था। चावल 15 से 20 रुपए प्रति किलोगेहूं का आटा 18 से 20 रुपए प्रति किलोचीनी 20 से 25 रुपए प्रति किलोदूध 15 से 20 रुपए लीटरअरहर दाल 40 से 50 रुपए प्रति किलो और तेल 50 से 60 रुपए लीटर के दाम से मिला करता था। उन्हें यह महंगा लग रहा है और वर्तमान में 120 रुपए प्रति लीटर का पेट्रोल सस्ता नजर  रहा। इसे राजनीतिक दृष्टिदोष कहते हैं जिससे शेषराव यादव ग्रस्ति हो चुके हैंइसीलिये उन्हें जनता पर पड़ रही महंगाई की मार जरा भी नजर नहीं  रही। गेहूं का दाम किसानों को 1500 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल मिलता था। कपास का बाजार मूल्य 4000 रुपए क्विंटल से अधिक रहता था। डीएपी 1,075, एनपीकेएस 1,175, कॉम्प्लैक्स फर्टिलाइजर लगभग 925 एवं पोटाश 450 रुपए प्रति बैग जो 50 किलो का हुआ करता था। आज वही खाद 40 किलो में 1500 से 2000 रुपए के बीच दाम है और मिलना भी बड़ा मुश्किल हो चुका। कांग्रेस की सरकार में किसान खुशहाल और युवा रोजगार से जुड़ा हुआ था फिर भी भाजपा जिलाध्यक्ष को कांग्रेस की सरकार में महंगाई नजर आई और भाजपा की सरकार में राहत यह उनका मानष्कि विकार है या फिर राजनीति की पराकाष्ठा जिसमें उन्हें भाजपा की महंगी गारंटी भी सस्ती नजर  रही।  

जनता देश के साथ पहले भी खड़ी थी आज भी खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगीलेकिन भाजपा के निर्णय के साथ बिल्कुल खड़ी नहीं हैअगर उन्हें सच्चाई जानना है तो एक बार जनता के बीच आकर कहें कि यह महंगाई नहीं राहत है तो उन्हें सटीक जवाब मिल जाएगा। कांग्रेस की सरकार पर झूठे आरोप लगाकर राजनीति चमकाने वाली भाजपा की सच्चाई जनता के सामने  चुकी है कि महंगाई के लिए भाजपा की आर्थिक नीतियां पूरी तरह से विफल है। क्योंकि भविष्य के संकट को लेकर देश के तमाम अर्थशास्त्रियों और कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा सरकार को चेतावनी दी थीलेकिन अहंकार में डूबी हुई महंगाई मैन मोदी सरकार ने पूर्व से कोई तैयारियां नहीं की। चुनाव खत्म होते ही भाजपा को देशहित नजर आया और भाजपा जिलाध्यक्ष को वैश्विक संकट की याद आई इसके पहले भाजपा सो रही थी। कांग्रेस की सरकार में महंगाई देखने और भाजपा सरकार में महंगाई दिखाई नहीं देना इसे कई मायनों में दृष्टिदोष भी कहा जाता है इसके लिए मानष्कि के साथ ही आंखों के विकार का सामना कर रहे शेषराव यादव को दोनों ही डॉक्टर की

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