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नगर में माताओं ने रखा पुत्रों के लिए हलषष्ठी व्रत

नगर में माताओं ने रखा पुत्रों के लिए हलषष्ठी व्रत

बड़ी संख्या में नगर के तालाबों नदियों में किया गया पूजन सामग्री का विसर्जन

जुन्नारदेव ।ईश्वर की भक्ति के लिए समर्पित भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी, हलछठ या फिर कहें ललही छठ के पर्व के रूप में मनाया जाता है। सनातन परंपरा में हल षष्ठी व्रत संतान की लंबी आयु और उसके सुख सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी पावन तिथि पर श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। मान्यता है कि इस व्रत को विधि विधान से करने पर संतान से जुड़ी बड़ी से बड़ी बलाएं दूर हो जाती हैं. संतान के सुख को बढ़ाने वाला हलषष्ठी व्रत 17 अगस्त 2022, बुधवार को मनाया गया हल षष्ठी या फिर कहें ललही छठ के व्रत में महिलाएं सबसे पहले पवित्र मिट्टी की मदद से एक बेदी बनाकर उसमें पलाश, गूलर आदि की टहनियों और कुश को मजबूती से लगाती हैं। इसके बाद विधि विधान से पूजा करते हुए बगैर जुते हुए खाद्य पदार्थ को अर्पित करती हैं। इस व्रत में महुआ, फसही का चावल और भैंस का दूध और उससे बनी चीजों का प्रयोग किया जाता है और महिलाएं इन्हीं के माध्यम से इस व्रत का पारण करती हैं।
संतान के सुख और लंबी आयु के लिए रखे जाने वाले इस व्रत को रखते समय न तो कोई अन्न खाया जाता है और न ही हल से जुता हुआ कोई अनाज या सब्जी आदि का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में इस पावन व्रत में तलाब में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थ अथवा बगैर जोते गए पैदा होने वाली चीजों का प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार हलषष्ठी व्रत में विशेष रूप से भैंस के दूध और उससे बनी चीजों का ही प्रयोग होता है। नगर में जगह-जगह हलषष्ठी माता का पूजन कर महिलाओं द्वारा स्थानीय तालाबों और नदियों में पूजन सामग्री का विसर्जन किया गया माताओं ने ईश्वर से अपने बेटों की सुख समृद्धि और दीर्घायु की कामना की

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