दादा गुरु भगवान के प्रथम आगमन पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्म का अलौकिक संगमधर्मनगरी लांजी के धूनी दरबार सेवकों ने किया पूजन-अर्चन, कोटेश्वर धाम पधारने का दिया निमंत्रण


सच की आंखें छिंदवाड़ा लांजी। धर्म और अध्यात्म की प्राचीन परंपराओं से ओतप्रोत धर्मनगरी लांजी का नाम सदियों से भगवान कोटेश्वर महादेव की तपोभूमि के रूप में श्रद्धा से लिया जाता रहा है। यहां की आध्यात्मिक चेतना, संत परंपरा और धूनी संस्कृति ने क्षेत्र को विशेष पहचान प्रदान की है। कहा जाता है कि कोटेश्वर धाम में वर्षों से साधु-संतों की तपस्या और आराधना होती रही है, जिसके कारण यह भूमि शिवभक्ति और साधना का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। दादा गुरु भगवान के प्रति लांजी धूनी दरबार के सेवकों की आस्था कोई नई नहीं है। कुछ माह पूर्व जब दादा गुरु भगवान मां नर्मदा परिक्रमा के पावन यात्रा मार्ग पर निकले थे, तब भी धर्मनगरी लांजी का यह सेवक जत्था उनकी सेवा, सत्संग और दर्शन हेतु पहुंचा था। सेवा, समर्पण और संतों के प्रति श्रद्धा की यही परंपरा लांजी की आध्यात्मिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। दादा गुरु भगवान के संबंध में श्रद्धालुओं का मानना है कि वे सरलता, सेवा, तप और मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उनके सत्संगों में अध्यात्म के साथ मानवता, सद्भाव और संयम का संदेश विशेष रूप से दिया जाता है, जिसके कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनसे जुड़ रहे हैं। जिले की पुण्यधरा पर दादा गुरु भगवान के प्रथम आगमन ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार कर दिया। कंजई में आयोजित स्वागत एवं अभिनंदन कार्यक्रम में भक्तों की भारी उपस्थिति ने वातावरण को पूर्णत: भक्तिमय बना दिया। जगह-जगह जयकारों, पुष्पवर्षा और पूजन-अर्चन के साथ दादा गुरु भगवान का आत्मीय स्वागत किया गया।
सावनमास में धर्मनगरी लांजी आने का दिया न्यौता....
इसके पश्चात धर्मनगरी लांजी के दादा धूनी दरबार के सेवकों ने लालबर्रा स्थित नर्मदा परिक्रमा वासी नरेंद्र बाँपचे के प्रतिष्ठान पहुंचकर आयोजित विशेष पूजन कार्यक्रम में सहभागिता की। इस दौरान श्रद्धा और समर्पण भाव से दादा गुरु भगवान का पूजन-अर्चन किया गया तथा उन्हें दादा कोटेश्वर नाथ भगवान का छायाचित्र भेंट कर सावन मास में धर्मनगरी लांजी स्थित प्राचीन कोटेश्वर धाम पधारने हेतु विनम्र आमंत्रण दिया गया। दादा गुरु भगवान ने भक्तों की भावना को सहर्ष स्वीकार करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। इस पावन अवसर पर धूनी दरबार लांजी से नारायणदत्त खरगाल, उमाकांत उपराड़े, मनोज किरनापुरे, कुशलेश कलपुरिया, परेश पटेल, महेंद्र मस्के, शिवम ठाकरे एवं नरेश डोलस सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में सभी भक्तों ने प्रार्थना की कि दादा गुरु भगवान की असीम कृपा समस्त क्षेत्रवासियों पर बनी रहे तथा धर्मनगरी लांजी की आध्यात्मिक ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित होती रहे।

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