भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा तथागत भगवान बुद्ध जयंती समारोह का किया आयोजनभगवान बुद्ध के ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’, ‘भवतु सब्ब मंगलम्’ के संदेश से विश्व शांति संभव — एड. लोखंडे


सच की आंखें छिंदवाड़ा: भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा तथागत भगवान बुद्ध की जयंती के अवसर पर स्थानीय डॉ. अंबेडकर तिराहे पर मुख्य समारोह का आयोजन किया गया, सर्वप्रथम तथागत भगवान बुद्ध के छायाचित्र एवं संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर भारतीय बौद्ध महासभा के प्रदेश सचिव एड. रमेश लोखंडे, जिला उपाध्यक्ष एड. राजेश सांगोडे, जिला संघटक वसंता सोमकुंवर, शैलेंद्र नारनवरे, एड. प्रशांत गजभिये, ममता लोखंडे, वंदना सोमकुंवर, उपासना लोखंडे, जयभीम सेना प्रमुख शिवम पहाड़े, करण कावड़े, अमन डेहरिया, अभिषेक पाटिल, विशाल दुफारे, प्रवीन पाटिल, दीपक बेलवंशी, पप्पू मंडराह, विशाल सहारे, श्रेय जगदेव, गौरव पाटिल, रामकृष्ण नागले, दिनेश इवनाती, शैलेंद्र मर्सकोले, मनीष मृदुलकर, महताब डोले, राजा गुनहरे, लबकुश डेहरिया सहित कई उपासक-उपासिका एवं भीम सैनिकों द्वारा माल्यार्पण किया गया, तद्पश्‍चात् पंचशील ध्वजारोहण कर सामूहिक बुद्ध वंदना की गई जयंती समारोह का संचालन जिला उपाध्यक्ष एड. राजेश सांगोडे द्वारा किया गया, समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश सचिव एड. रमेश लोखंडे ने संबोधित करते हुए कहा कि तथागत भगवान बुद्ध ने सामाजिक विषमता को समाप्त कर आम जनता को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' एवं 'भवतु सब्ब मंगलम्' का संदेश दिया, जिसे आम जनता तक पहुँचाकर विश्व शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है, उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा को अद्वितीय दिन बताया क्योंकि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—तीनों घटनाएं घटित हुईं, नेपाल के लुंबिनी में उनका जन्म, बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्ति एवं कुशीनगर में महापरिनिर्वाण हुआ, इस दृष्टि से यह दिन संपूर्ण विश्व के नागरिकों के लिए केवल स्मरण का दिन ही नहीं, बल्कि जीवन की पूर्णता, जागरण एवं मुक्ति का प्रतीक है, भगवान बुद्ध ने मध्यम मार्ग का सिद्धांत दिया, जो संतुलन, सजगता और समत्व का मार्ग है, गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना प्रथम उपदेश दिया, जिसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' के नाम से जाना जाता है, उनके चार आर्य सत्य—दुःख, दुःख का कारण, दुःख का निरोध और दुःख-निरोध-गामिनी प्रतिपदा—मानव जीवन के गहन विश्लेषण और समाधान प्रस्तुत करते हैं, आज विश्व युद्ध, आतंकवाद, हिंसा, असहिष्णुता और मानसिक तनाव से जूझ रहा है, ऐसे समय में बुद्ध का करुणा एवं शांति का संदेश विश्वशांती विश्‍वकल्‍याण के लिए आज भी प्रासंगिक है, बुद्ध कहते थे द्वेष से द्वेष कभी समाप्‍त नहीं होता, यह केवल एक नैतिक उपदेश नहीं वल्कि सामाजिक एवं वैश्विक शांति का सूत्र बताते हुए राष्‍ट्र समाज और व्‍यक्ति को इस सिद्धांत को अपनाने की आवश्‍यकता बताई जिला उपाध्यक्ष एड. राजेश सांगोडे ने कहा कि बुद्ध ने अपने युग की जनता को धार्मिक, सामाजिक अंधविश्वासों एवं पाखंडों की ओर बढ़ते देखा, उन्होंने साधारण जनता को अज्ञान में पाया, महिलाओं को अपमानित होते देखा और शूद्रों पर अत्याचार होते देखे, तब उनके जीवन को ऊपर उठाने के लिए बुद्ध ने उन्होने शिक्षा प्रदान करने का कार्य किया, बुद्ध की शिक्षा एवं सिद्धांत आत्‍मसात करले तो उनके संघर्षो का सामाधान संभव बताया, जयभीम सेना प्रमुख शिवम पहाड़े ने कहा कि बुद्ध के अनुसार मन की हिंसा, ईर्ष्या, क्रोध, लोभ और अहंकार ही मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु बताते हुये बुद्ध के विचारो पर चलने की आवश्‍यकता बताई, भगवान बुद्ध जयंती समारोह पर आभार एवं समापन प्रदेश सचिव एड. रमेश लोखंडे द्वारा किया गया,
एड. रमेश लोखंडे

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